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यूरोप में जनाक्रोश: फ्रांस से ब्रसेल्स तक सड़कों पर प्रदर्शन

by on | 2026-10-25 12:00:54

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यूरोप में जनाक्रोश: फ्रांस से ब्रसेल्स तक सड़कों पर प्रदर्शन

विश्व डेस्क | बेबाक24 न्यूज़

यूरोप के कई देशों में बढ़ती महंगाई, आवास की समस्या, शिक्षा व्यवस्था और सरकारी नीतियों के विरोध में प्रदर्शन तेज हो गए हैं। फ्रांस, इटली, स्पेन, पुर्तगाल, अल्बानिया और बेल्जियम में हजारों लोग सड़कों पर उतरे। कई स्थानों पर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, जबकि कुछ शहरों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं। हालात संभालने के लिए पुलिस ने आंसू गैस, पानी की बौछार और मिर्च स्प्रे का इस्तेमाल किया।

फ्रांस में लाखों लोगों के प्रदर्शन का दावा

फ्रांस के गृह मंत्रालय के अनुसार, देशभर में लगभग 4.1 लाख लोगों ने प्रदर्शनों में हिस्सा लिया। वहीं, श्रमिक संगठन जीसीटी ने प्रदर्शनकारियों की संख्या करीब 8 लाख बताई। गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज के मुताबिक, 135 लोगों को गिरफ्तार किया गया और उनके पास से कई तरह के हथियार बरामद किए गए।

कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए देशभर में करीब 70,000 पुलिसकर्मी तैनात किए गए। हेलीकॉप्टर, बख्तरबंद वाहन और पानी की बौछार करने वाले वाहन भी तैयार रखे गए थे।

पेरिस में दिन के समय प्रदर्शन काफी हद तक शांतिपूर्ण रहे, लेकिन शाम को कुछ जगहों पर हिंसा हुई। ल्योन में प्रदर्शनकारियों ने सड़क जाम करने की कोशिश की, जबकि नांत में कुछ लोगों ने पुलिस की घेराबंदी तोड़ दी। जवाब में पुलिस ने आंसू गैस और पानी की बौछार का इस्तेमाल किया।

ऑरलियंस में दक्षिणपंथी नेशनल रैली पार्टी के सम्मेलन के विरोध में भी बड़ा मार्च निकाला गया। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और विपक्षी नेता मरीन ले पेन, दोनों के खिलाफ नारे लगाए। पुलिस ने वहां प्रदर्शनकारियों की संख्या 11,000 बताई, जबकि आयोजकों ने 26,000 लोगों के शामिल होने का दावा किया।

इटली में मेलोनी सरकार के खिलाफ नारे

इटली के रोम और मिलान में हजारों युवाओं, छात्रों और नागरिकों ने प्रदर्शन किया। रोम में प्रधानमंत्री जियॉर्जिया मेलोनी के इस्तीफे की मांग उठी। पिछले सप्ताह हुई तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाओं के बाद प्रमुख शहरों में सुरक्षा बढ़ा दी गई थी।

मिलान में प्रदर्शनकारियों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ नारे लगाए। ऊर्जा नियामक कार्यालय के बाहर कुछ लोगों ने खाद फेंककर विरोध जताया और बिजली बिल की प्रतीकात्मक प्रति जलाई। पिछले प्रदर्शनों में दुकानों को नुकसान पहुंचने के बाद कई बड़े ब्रांडों के प्रतिष्ठान बंद रखे गए।

रोम में सुरक्षा अधिकारियों ने प्रमुख खरीदारी वाली सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर निगरानी बढ़ाई। कुछ प्रदर्शनकारियों ने कोलोसियम में प्रवेश करने की कोशिश की, लेकिन सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें बाहर कर दिया। वहीं, कई छात्रों ने शांतिपूर्ण मार्च निकालते हुए स्पष्ट किया कि वे तोड़फोड़ का समर्थन नहीं करते।

स्पेन में पेंशन और मकानों के किराये का मुद्दा

स्पेन की राजधानी मैड्रिड में हजारों पेंशनभोगियों और अन्य नागरिकों ने मार्च निकालकर सार्वजनिक पेंशन में कटौती नहीं करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने पेंशन व्यवस्था के निजीकरण को लेकर भी चिंता जताई।

देश में मकानों के किराये और आवास की बढ़ती लागत भी विरोध का बड़ा मुद्दा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि घरों का खर्च लगातार बढ़ने से आम लोगों के लिए किराया चुकाना मुश्किल हो रहा है। इसी बीच, स्पेन में 11 नवंबर को आवास संबंधी मांगों को लेकर हड़ताल का आह्वान किया गया है।

अल्बानिया में छात्रों का आंदोलन हिंसक हुआ

अल्बानिया की राजधानी तिराना में शिक्षा व्यवस्था, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के खिलाफ प्रदर्शन हिंसक हो गए। प्रदर्शनकारियों ने सरकारी इमारतों को निशाना बनाया, कृषि मंत्रालय के प्रवेश द्वार में आग लगाई और पुलिस पर पत्थर, पटाखे तथा पेट्रोल बम फेंके जाने की घटनाएं सामने आईं।

पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस, लाठियों और पानी की बौछार का इस्तेमाल किया। अधिकारियों के अनुसार, शनिवार को करीब 2,500 पुलिसकर्मी सड़कों पर तैनात थे।

छात्र कम शिक्षण शुल्क, शिक्षा में अधिक सरकारी निवेश और व्यवस्था में भ्रष्टाचार खत्म करने की मांग कर रहे हैं। कुछ प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री एडी रामा के इस्तीफे की मांग कर रहे व्यापक सरकार-विरोधी आंदोलन में भी शामिल हुए। रामा ने कहा कि उनकी सरकार छात्रों की मांगों पर जवाब तैयार कर रही है और उन्हें बातचीत के लिए आमंत्रित किया है।

ब्रसेल्स में पुलिस से भिड़े प्रदर्शनकारी

बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स में शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और मिर्च स्प्रे का इस्तेमाल किया।

कुछ प्रदर्शनकारियों ने सड़क संकेतों और अन्य वस्तुओं को स्कूटरों तथा साइकिलों के ढेर पर फेंक दिया और उनमें आग लगाने की कोशिश की।

पुर्तगाल में किफायती आवास की मांग

पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में भी बड़ी संख्या में लोग किफायती मकानों की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के उन प्रस्तावित उपायों का विरोध किया, जिनके तहत किराये में वार्षिक वृद्धि पर लगी सीमा में ढील देने और किराया नहीं चुका पाने वाले किरायेदारों को बेदखल करने की प्रक्रिया आसान बनाने की बात कही गई है।

प्रधानमंत्री लुइस मोंटेनेग्रो ने इन उपायों का बचाव करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य मकान मालिकों और किरायेदारों के बीच भरोसा बढ़ाना तथा किराये के बाजार को प्रोत्साहित करना है। हालांकि, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इससे किरायेदारों की स्थिति और कमजोर हो सकती है।

आने वाले दिनों में भी जारी रहेंगे प्रदर्शन

रिपोर्ट के मुताबिक, फ्रांस में प्रमुख श्रमिक संगठनों ने 5 नवंबर को देशव्यापी आम हड़ताल का आह्वान किया है। इटली में 20 नवंबर को विरोध दिवस आयोजित करने की योजना है। जर्मनी में युवा संगठन जेन जी रिगेल्ट ने 31 अक्तूबर को देशभर में प्रदर्शन का आह्वान किया है।

युवाओं का कहना है कि बढ़ती जीवन-यापन लागत, घटते अवसर और मौजूदा आर्थिक नीतियां उनके भविष्य को प्रभावित कर रही हैं। अलग-अलग देशों में विरोध के मुद्दे भले ही अलग हैं, लेकिन महंगाई, आवास, शिक्षा और सरकारी नीतियों को लेकर असंतोष कई प्रदर्शनों में प्रमुखता से सामने आया है।

बेबाक24 टेक

यूरोप में चल रहे प्रदर्शनों के पीछे एक ही कारण नहीं है। फ्रांस में श्रमिक और राजनीतिक असंतोष, इटली में सरकार-विरोधी नाराजगी, स्पेन और पुर्तगाल में आवास व पेंशन संबंधी चिंताएं तथा अल्बानिया और ब्रसेल्स में शिक्षा से जुड़े मुद्दे प्रमुख हैं। कुछ स्थानों पर हिंसा ने कानून-व्यवस्था की चुनौती बढ़ाई है, जबकि अनेक प्रदर्शन शांतिपूर्ण भी रहे हैं।



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