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सेना की नई युद्ध नीति आज होगी जारी, ड्रोन से साइबर युद्ध तक पर जोर

by on | 2026-10-23 11:25:29

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सेना की नई युद्ध नीति आज होगी जारी, ड्रोन से साइबर युद्ध तक पर जोर

नई दिल्ली | बेबाक24 न्यूज़

आधुनिक युद्ध की बदलती चुनौतियों के बीच भारतीय सेना अपनी रणनीति में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। शुक्रवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सेना की नई लैंड वॉरफेयर डॉक्ट्रिन जारी करेंगे। इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), ड्रोन, रोबोटिक्स, साइबर हमलों, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और अंतरिक्ष से जुड़े खतरों से निपटने की रणनीति पर जोर दिया जाएगा।

नई रूपरेखा का उद्देश्य सैन्य कमांडरों को भविष्य के युद्धों के लिए स्पष्ट दिशा देना और थल सेना, नौसेना तथा वायुसेना के बीच संसाधनों के बेहतर समन्वय को बढ़ावा देना है।

2018 की रणनीति के बाद बड़ा बदलाव

भारतीय सेना ने आखिरी बार वर्ष 2018 में अपनी लैंड वॉरफेयर डॉक्ट्रिन जारी की थी। इसके बाद वैश्विक संघर्षों में तकनीक की भूमिका तेजी से बढ़ी है। यूक्रेन और पश्चिम एशिया के युद्धों ने दिखाया है कि आधुनिक संघर्षों में पारंपरिक सैन्य ताकत के साथ ड्रोन, डिजिटल प्रणालियों और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध की क्षमता भी महत्वपूर्ण हो गई है।

इन्हीं बदलावों को ध्यान में रखते हुए सेना अपनी रणनीतिक दिशा को नए सिरे से तैयार कर रही है, ताकि बदलते सुरक्षा हालात और आधुनिक हथियार प्रणालियों के अनुरूप सैन्य तैयारियां की जा सकें।

कमांडरों को मिलेगी स्पष्ट दिशा

सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, युद्ध संबंधी डॉक्ट्रिन का उद्देश्य मैदानी कमांडरों को यह समझाना है कि वरिष्ठ सैन्य नेतृत्व भविष्य के अभियानों को किस दृष्टिकोण से देखता है।

यह दस्तावेज हर परिस्थिति के लिए तयशुदा आदेश देने के बजाय व्यापक रणनीतिक दिशा प्रदान करेगा। इससे 13 लाख से अधिक जवानों वाली सेना में साझा सोच और सैन्य अभियानों की योजना बनाने में एकरूपता लाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

चार प्रमुख तकनीकी क्षेत्रों पर जोर

नई डॉक्ट्रिन में आधुनिक युद्ध के कई महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया है।

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता और एल्गोरिदम: सूचनाओं के विश्लेषण और सैन्य निर्णय प्रक्रिया में तकनीक का उपयोग।

  • ड्रोन और मानवरहित प्रणालियां: निगरानी, टोह लेने और सैन्य अभियानों में मानवरहित उपकरणों की बढ़ती भूमिका।

  • रोबोटिक्स: जोखिम भरे सैन्य कार्यों में रोबोटिक प्रणालियों का इस्तेमाल।

  • साइबर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध: डिजिटल नेटवर्क, संचार प्रणालियों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से जुड़े खतरों से निपटने की तैयारी।

सेना इन तकनीकों को केवल उच्च स्तर तक सीमित रखने के बजाय युद्धक इकाइयों के निचले स्तर तक पहुंचाने पर भी काम कर रही है।

तीनों सेनाओं के तालमेल को मिलेगी गति

नई डॉक्ट्रिन में तीनों सेनाओं के बीच संसाधनों के साझा इस्तेमाल और बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य संयुक्त सैन्य अभियानों की योजना और क्रियान्वयन को अधिक प्रभावी बनाना है।

इससे थिएटर कमांड के गठन की प्रक्रिया को भी गति मिलने की उम्मीद है। थिएटर कमांड की अवधारणा के तहत किसी निर्धारित क्षेत्र में सैन्य संसाधनों और अभियानों के समन्वय को बेहतर बनाने का प्रयास किया जाता है।

चीन-पाकिस्तान सीमा से लेकर सियाचिन तक तैयारी

भारतीय सेना को राजस्थान के गर्म रेगिस्तानी इलाकों से लेकर सियाचिन जैसे अत्यधिक ठंडे क्षेत्रों तक अलग-अलग परिस्थितियों में काम करना पड़ता है। चीन और पाकिस्तान से लगी सीमाओं पर बदलते सुरक्षा समीकरणों के बीच नई डॉक्ट्रिन का उद्देश्य विभिन्न भौगोलिक और सामरिक परिस्थितियों के अनुरूप तैयारी को दिशा देना है।

इसके साथ ही स्वदेशी हथियारों और सैन्य उपकरणों को परिचालन योजनाओं में बेहतर तरीके से शामिल करने पर भी जोर रहेगा।

बेबाक24 टेक

भारतीय सेना की नई लैंड वॉरफेयर डॉक्ट्रिन आधुनिक युद्ध में तकनीक, संयुक्त सैन्य अभियानों और बदलती सुरक्षा चुनौतियों के महत्व को रेखांकित करती है। ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स और साइबर सुरक्षा को सैन्य योजना में शामिल करना भविष्य की तैयारियों का अहम हिस्सा बन सकता है। हालांकि, नई रणनीति का वास्तविक प्रभाव इसके क्रियान्वयन, प्रशिक्षण और आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता पर निर्भर करेगा।



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