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यूएन की साख पर भारत का सवाल, पी. हरीश बोले- 80 साल पुराने युद्ध से कब तक चलेगी दुनिया?

by on | 2026-10-23 11:25:20

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यूएन की साख पर भारत का सवाल, पी. हरीश बोले- 80 साल पुराने युद्ध से कब तक चलेगी दुनिया?

संयुक्त राष्ट्र | बेबाक24 न्यूज़

भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मौजूदा व्यवस्था और सुधार प्रक्रिया में हो रही देरी पर सवाल उठाए हैं। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने कहा कि 80 साल पहले हुए द्वितीय विश्व युद्ध के परिणामों के आधार पर आज की दुनिया का भविष्य तय नहीं किया जा सकता। उन्होंने जोर दिया कि सुरक्षा परिषद को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण और वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप बनाने की जरूरत है।

भारत ने आरोप लगाया कि कुछ देश सुरक्षा परिषद में सुधार की दिशा में बातचीत आगे बढ़ाने में बाधा डाल रहे हैं। भारतीय प्रतिनिधि ने सुधार प्रक्रिया के लिए लिखित मसौदा, स्पष्ट समयसीमा और ठोस दिशा तय करने की मांग की।

द्वितीय विश्व युद्ध में भारत के योगदान का जिक्र

पी. हरीश ने द्वितीय विश्व युद्ध में भारतीयों की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि करीब 25 लाख भारतीयों ने युद्ध में हिस्सा लिया था और लगभग 90,000 भारतीय सैन्य सेवा के दौरान मारे गए थे।

उन्होंने बंगाल के भीषण अकाल का भी जिक्र किया और कहा कि औपनिवेशिक युद्ध नीतियों के दौर में 40 लाख से अधिक लोगों की जान गई थी। उनके अनुसार, इन ऐतिहासिक अनुभवों और योगदान को वैश्विक निर्णय लेने वाली संस्थाओं की मौजूदा व्यवस्था में पर्याप्त महत्व नहीं मिला।

हरीश ने कहा कि सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता और विशेष अधिकारों की मौजूदा संरचना मुख्य रूप से द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की परिस्थितियों पर आधारित है। भारत का मानना है कि आज की दुनिया में देशों और क्षेत्रों का अधिक संतुलित प्रतिनिधित्व होना चाहिए।

सुरक्षा परिषद में सुधार की राह में क्या बाधा?

भारतीय प्रतिनिधि ने 1945 में संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत स्थापित विशेष अधिकारों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनका इस्तेमाल सुधार प्रक्रिया को अनिश्चितकाल तक रोकने के लिए नहीं होना चाहिए।

भारत ने इटली के नेतृत्व वाले ‘यूनाइटिंग फॉर कंसेंसस’ समूह पर सुधार संबंधी बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी मसौदे को स्वीकार करने में बाधा डालने का आरोप लगाया। पाकिस्तान भी इस समूह का सदस्य है।

यह समूह सुरक्षा परिषद के विस्तार और स्थायी सदस्यता से जुड़े प्रस्तावों पर अलग दृष्टिकोण रखता है। भारत का कहना है कि सुधार प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए बातचीत को ठोस आधार देना आवश्यक है।

पहले मसौदा, फिर बातचीत की मांग

पी. हरीश ने सवाल उठाया कि सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए होने वाली अंतर-सरकारी वार्ता की प्रक्रिया अन्य बहुपक्षीय वार्ताओं से अलग क्यों होनी चाहिए।

भारत की आपत्ति है कि लिखित मसौदा तैयार करने से पहले ही आम सहमति की शर्त रख देने से बातचीत आगे बढ़ना मुश्किल हो जाता है। भारतीय पक्ष का तर्क है कि पहले प्रस्तावों का मसौदा तैयार होना चाहिए, फिर सदस्य देशों को उस पर चर्चा और संशोधन का अवसर मिलना चाहिए।

भारत ने मांग की कि सुधार प्रक्रिया के लिए स्पष्ट समयसीमा तय की जाए और बातचीत को आगे बढ़ाने की दिशा निर्धारित हो, ताकि चर्चा केवल औपचारिक बैठकों तक सीमित न रहे।

भारत क्यों चाहता है सुरक्षा परिषद में बदलाव?

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले करती है। इसकी मौजूदा स्थायी सदस्यता में चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका शामिल हैं। इन पांचों देशों के पास वीटो का अधिकार है।

भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद के विस्तार और स्थायी सदस्यता में सुधार की मांग करता रहा है। उसका तर्क है कि वर्तमान वैश्विक व्यवस्था में एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका सहित विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व अधिक संतुलित होना चाहिए।

बेबाक24 टेक

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार का मुद्दा वैश्विक प्रतिनिधित्व, निर्णय लेने की शक्ति और संस्थागत जवाबदेही से जुड़ा है। भारत ने ऐतिहासिक योगदान का हवाला देते हुए मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं और बातचीत के लिए स्पष्ट मसौदे तथा समयसीमा की मांग की है। सुधार कब और किस रूप में लागू होगा, यह सदस्य देशों के बीच आगे होने वाली वार्ताओं और आवश्यक सहमति पर निर्भर करेगा।



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