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अंतरिक्ष में भी जंग की तैयारी? अमेरिका ने माना- कक्षा में तैनात हैं सैन्य हथियार

by admin@bebak24.com on | 2026-09-15 11:46:32

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अंतरिक्ष में भी जंग की तैयारी? अमेरिका ने माना- कक्षा में तैनात हैं सैन्य हथियार

नई दिल्ली | बेबाक24 न्यूज़

अंतरिक्ष अब सिर्फ वैज्ञानिक खोज और संचार का क्षेत्र नहीं रह गया है। अमेरिका ने पुष्टि की है कि उसके पास कक्षा में तैनात ऐसी सैन्य क्षमताएं मौजूद हैं, जिनका इस्तेमाल संभावित दुश्मन की कार्रवाई का जवाब देने के साथ आक्रामक और रक्षात्मक अभियानों में किया जा सकता है। यह खुलासा ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका, चीन और रूस के बीच अंतरिक्ष में सैन्य बढ़त हासिल करने की होड़ तेज हो रही है।

अमेरिकी स्पेस फोर्स के एक प्रवक्ता के मुताबिक, अमेरिका के पास कक्षा में तैनात ‘स्पेस कंट्रोल’ हथियार मौजूद हैं। हालांकि, इनकी संख्या, तकनीकी क्षमता और सटीक तैनाती से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

अंतरिक्ष में ‘स्पेस कंट्रोल’ क्षमता

अमेरिकी स्पेस फोर्स के अनुसार, स्पेस कंट्रोल का उद्देश्य अंतरिक्ष क्षेत्र में विरोधी की क्षमताओं को चुनौती देना और अमेरिकी सैन्य बलों की सुरक्षा करना है। इसके तहत काइनेटिक और नॉन-काइनेटिक दोनों तरह की क्षमताओं का इस्तेमाल किया जा सकता है।

स्पेस फोर्स ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन क्षमताओं का उपयोग केवल बचाव तक सीमित नहीं है। जरूरत पड़ने पर इन्हें आक्रामक अभियानों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसे में विरोधी देशों के उपग्रहों को प्रभावित या निष्क्रिय करने की क्षमता भविष्य के संघर्षों में अहम भूमिका निभा सकती है।

चीन और रूस पर अमेरिका की नजर

अमेरिका चीन और रूस को अंतरिक्ष क्षेत्र में प्रमुख रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी मानता है। अमेरिकी आकलन के अनुसार, चीन अपनी सैन्य आधुनिकीकरण नीति के तहत अंतरिक्ष और काउंटरस्पेस क्षमताओं को लगातार मजबूत कर रहा है। रूस भी अंतरिक्ष को संभावित युद्धक्षेत्र के रूप में देखता है और इससे जुड़ी सैन्य क्षमताओं के विकास पर काम कर रहा है।

उपग्रह आज सैन्य संचार, निगरानी, खुफिया जानकारी और दिशा-निर्धारण जैसी जरूरी व्यवस्थाओं का आधार हैं। इसलिए किसी विरोधी के उपग्रहों को बाधित करने की क्षमता किसी सैन्य संघर्ष में रणनीतिक बढ़त दे सकती है।

अंतरिक्ष के सैन्यीकरण की शुरुआत पुरानी

अंतरिक्ष का सैन्य इस्तेमाल कोई नई अवधारणा नहीं है। 1957 में सोवियत संघ के स्पुतनिक प्रक्षेपण के बाद अमेरिका और सोवियत संघ ने अंतरिक्ष आधारित सैन्य तकनीकों पर काम तेज किया था। उस दौर में कक्षा में परमाणु हथियारों की तैनाती को लेकर सबसे ज्यादा चिंता थी।

1967 की बाह्य अंतरिक्ष संधि ने पृथ्वी की कक्षा में सामूहिक विनाश के हथियार तैनात करने पर रोक लगाई। हालांकि, उपग्रहों को बाधित करने या सैन्य अभियानों के लिए अंतरिक्ष आधारित पारंपरिक क्षमताओं पर संधि में व्यापक रोक नहीं है।

अब चुनौती सिर्फ धरती तक सीमित नहीं

अमेरिका, चीन, रूस और भारत समेत कई देश अंतरिक्ष आधारित सैन्य क्षमताओं को विकसित कर रहे हैं। ऐसे में भविष्य के संघर्षों में किसी देश की अंतरिक्ष क्षमता उसकी जमीन और समुद्र पर मौजूद सैन्य ताकत जितनी ही महत्वपूर्ण हो सकती है।

बेबाक24 टेक: अमेरिका की स्वीकारोक्ति अंतरिक्ष के बढ़ते सैन्यीकरण की ओर साफ संकेत देती है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि किसी संघर्ष में उपग्रह निशाना बने तो उसका असर सिर्फ सैन्य तंत्र पर नहीं, बल्कि संचार, नेविगेशन और दूसरी नागरिक सेवाओं पर भी पड़ सकता है। आने वाले वर्षों में अंतरिक्ष में सैन्य संतुलन वैश्विक सुरक्षा का एक अहम मोर्चा बनने वाला है।



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