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यूपी में सपा-कांग्रेस की सीटों पर खींचतान: 111 सीटें अपने पास रखेगी सपा, कांग्रेस को भाजपा वाली सीटों का प्रस्ताव

by admin@bebak24.com on | 2026-09-15 11:46:26

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यूपी में सपा-कांग्रेस की सीटों पर खींचतान: 111 सीटें अपने पास रखेगी सपा, कांग्रेस को भाजपा वाली सीटों का प्रस्ताव

नई दिल्ली | बेबाक24 न्यूज़

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर तस्वीर अभी साफ नहीं हो पाई है। दोनों दल अपने-अपने आकलन और आंतरिक सर्वे के आधार पर अधिक सीटों का दावा कर रहे हैं। सपा अपनी जीती हुई 111 सीटों पर खुद मैदान में उतरने की तैयारी में है, जबकि कांग्रेस गठबंधन में पहले की तुलना में बड़ी भूमिका चाहती है।

कांग्रेस 100 से अधिक सीटों पर कर रही दावा

सपा और कांग्रेस दोनों ने आगामी चुनाव को लेकर आंतरिक सर्वे कराए हैं। सूत्रों के मुताबिक, सपा के आकलन में पार्टी को 2022 के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है, हालांकि अकेले बहुमत हासिल करने की स्थिति अभी दूर दिखाई जा रही है।

दूसरी ओर, कांग्रेस ने अपने आकलन में 100 से अधिक सीटों को जीतने योग्य माना है। पार्टी 2024 के लोकसभा चुनाव में अपने प्रदर्शन को आधार बनाकर अधिक सीटों की मांग कर रही है। कांग्रेस की कोशिश हर जिले में कम से कम एक सीट पर चुनाव लड़कर संगठन की मौजूदगी मजबूत करने की भी है।

सपा की 111 सीटों पर कोई समझौता नहीं

सपा ने संकेत दिया है कि 2022 में जीती गई 111 विधानसभा सीटों पर वह खुद ही चुनाव लड़ेगी। पार्टी ने इन सीटों पर अपने मौजूदा विधायकों और संभावित उम्मीदवारों को लेकर तैयारी शुरू कर दी है।

सपा का मानना है कि जीती हुई सीटों पर प्रत्याशी और स्थानीय जातीय समीकरण पहले से मजबूत हैं। इसलिए इन सीटों को सहयोगी दल के लिए छोड़ने के बजाय पार्टी अपने कब्जे में रखना चाहती है।

कांग्रेस को भाजपा की जीती सीटों का प्रस्ताव

सीट बंटवारे के मौजूदा फॉर्मूले में कांग्रेस के लिए मुख्य रूप से वे सीटें रखे जाने की चर्चा है, जिन पर पिछली विधानसभा में भाजपा या उसके सहयोगी विजयी रहे थे। सपा और कांग्रेस के बीच सीटों की संख्या तय होने के बाद संभावित उम्मीदवारों और क्षेत्रीय समीकरणों को भी अंतिम रूप दिया जाएगा।

सपा पहले कांग्रेस के लिए 60 से कम सीटों के आसपास का विकल्प सोच रही थी, लेकिन बदलते राजनीतिक समीकरणों में यह संख्या बढ़कर 75 से 80 के बीच पहुंच सकती है।

दोनों दलों के सामने वोट बैंक का संतुलन चुनौती

गठबंधन की सबसे बड़ी चुनौती 2024 के लोकसभा चुनाव में बने सामाजिक समीकरण को विधानसभा चुनाव में दोहराने की है। सपा जहां पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक सामाजिक आधार को मजबूत रखने पर जोर दे रही है, वहीं कांग्रेस अपने लिए नए मतदाताओं को जोड़ने की कोशिश कर रही है।

दोनों दलों का आकलन है कि मौजूदा आधार के ऊपर यदि कांग्रेस अतिरिक्त मतदाताओं को जोड़ने में सफल रहती है, तो गठबंधन को चुनावी लाभ मिल सकता है।

जेन जी और महिलाओं पर अलग रणनीति

चुनाव की तैयारियों में युवा और महिला मतदाताओं को भी अहम माना जा रहा है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी जेन जी के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव युवाओं और महिलाओं के लिए अलग राजनीतिक रणनीति पर काम कर रहे हैं।

ऐसे में सीट बंटवारा केवल संख्या का सवाल नहीं है। दोनों दलों को यह तय करना होगा कि किस क्षेत्र में किस दल का संगठन, सामाजिक आधार और उम्मीदवार गठबंधन के लिए ज्यादा प्रभावी साबित हो सकता है।

बेबाक24 टेक: सपा-कांग्रेस गठबंधन के सामने असली चुनौती सीटों की संख्या से ज्यादा आपसी भरोसे और चुनावी जमीन के बंटवारे की है। सपा अपनी जीती सीटों को सुरक्षित रखना चाहती है, जबकि कांग्रेस ज्यादा राजनीतिक हिस्सेदारी के जरिए अपना आधार विस्तार करना चाहती है। अंतिम समझौता यह तय करेगा कि 2027 में दोनों दल साथ लड़ते हैं तो गठबंधन की रणनीति कितनी स्पष्ट और जमीन पर कितनी प्रभावी होगी।



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