by admin@bebak24.com on | 2026-09-15 11:45:29
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चंडीगढ़ | बेबाक24 न्यूज़
पंजाब में बिजली कटौती को लेकर विरोध तेज हो गया है। किसानों से लेकर उद्योगपतियों और विपक्षी दलों तक ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बढ़ते दबाव के बीच पंजाब सरकार ने पीएसपीसीएल के सीएमडी आईएएस बसंत गर्ग को पद से हटा दिया और उनकी जगह गुरकीरत किरपाल सिंह को नया सीएमडी नियुक्त किया है।
सरकार का दावा है कि अब बिजली संकट काफी हद तक दूर कर लिया गया है और 13 सितंबर की सुबह 7 बजे के बाद बिजली की कमी के कारण कोई कटौती नहीं की गई। हालांकि, दूसरी ओर किसानों और उद्योग जगत का कहना है कि पिछले दिनों की लंबी कटौती से उत्पादन और रोजमर्रा का काम बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
बिजली संकट को लेकर सोमवार को पंजाब के कई हिस्सों में प्रदर्शन हुए। पटियाला में पावरकॉम मुख्यालय की ओर बढ़ रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पुलिस ने पानी की बौछारों से रोक दिया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया गया।
जगरांव में किसानों ने कई घंटे धरना देने के बाद जगरांव-जालंधर मार्ग पर यातायात रोक दिया। फरीदकोट में भी किसानों ने पावरकॉम कार्यालय का घेराव किया। लुधियाना में डाइंग उद्योग से जुड़े उद्यमियों ने वर्धमान चौक पर प्रदर्शन करते हुए लुधियाना-चंडीगढ़ मार्ग बाधित किया।
लुधियाना के उद्योगपतियों ने दावा किया कि उन्हें रोजाना करीब 14 घंटे तक बिजली कटौती का सामना करना पड़ा। उनका कहना है कि लगातार बिजली आपूर्ति बाधित होने से उत्पादन प्रभावित हुआ और श्रमिकों के कारखानों से जाने की स्थिति बनी।
उद्योग जगत के अनुसार बिजली की दर भी करीब 8 रुपये से बढ़कर 9.50 रुपये प्रति यूनिट तक पहुंच गई है। कुछ उद्योगपतियों ने दावा किया कि एक फैक्टरी का मासिक बिजली बिल 15 लाख रुपये से बढ़कर करीब 18 लाख रुपये तक पहुंच गया।
पंजाब में सोमवार को बिजली की मांग 17,405 मेगावाट तक पहुंच गई। इससे पहले 18 जुलाई को 17,452 मेगावाट की सर्वाधिक मांग दर्ज की गई थी। मांग बढ़ने के साथ करीब 1,478 मेगावाट उत्पादन क्षमता प्रभावित रही।
रोपड़, लहरा मोहब्बत और तलवंडी साबो ताप विद्युत संयंत्रों की कुछ इकाइयां कम क्षमता पर चलीं। वहीं पानी की कमी के कारण जलविद्युत की पांच इकाइयां बंद रहीं। इससे बिजली व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ा।
बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने कहा कि राज्य ने बिजली संकट पर काबू पा लिया है। उनके मुताबिक 13 सितंबर सुबह 7 बजे के बाद आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक और कृषि क्षेत्रों में बिजली कटौती नहीं की गई।
मंत्री ने बताया कि दो निजी ताप विद्युत संयंत्रों में आई तकनीकी खराबियां दूर कर दी गई हैं। इसके अलावा एक अन्य निजी संयंत्र से करीब 100 मेगावाट अतिरिक्त बिजली मिलना शुरू हो गया है। किसानों को सिंचाई के लिए पहले के 8 घंटे के मुकाबले 10 घंटे बिजली उपलब्ध कराने का भी दावा किया गया।
सौंद ने बिजली संकट के लिए केंद्र से कोयले की आपूर्ति में कमी और पंजाब के हिस्से की करीब 1,000 मेगावाट बिजली नहीं मिलने को जिम्मेदार बताया। उनका कहना है कि राज्य की व्यवस्था करीब 17,000 मेगावाट तक की मांग पूरी करने में सक्षम है।
बिजली संकट के बीच पीएसपीसीएल के सीएमडी बसंत गर्ग को हटाए जाने के फैसले ने राजनीतिक चर्चा को और तेज कर दिया है। सरकार की ओर से इसे प्रशासनिक स्तर पर उठाया गया कदम बताया जा रहा है, लेकिन विपक्ष इसे संकट के लिए जिम्मेदारी तय किए जाने के संकेत के तौर पर देख रहा है।
फिलहाल सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि बिजली आपूर्ति सामान्य रहने के दावे को जमीन पर भी कायम रखा जाए। खासकर कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली की नियमित उपलब्धता आने वाले दिनों में सरकार के दावे की असली परीक्षा होगी।
बेबाक24 टेक: पंजाब का मौजूदा बिजली संकट केवल आपूर्ति का मामला नहीं रह गया है। रिकॉर्ड मांग, उत्पादन इकाइयों पर दबाव और किसानों-उद्योगों के विरोध ने इसे प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों मुद्दों में बदल दिया है। सरकार ने स्थिति संभलने का दावा किया है, लेकिन स्थायी समाधान तभी माना जाएगा जब कटौती खत्म होने का असर खेतों और कारखानों तक लगातार दिखाई दे।
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