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वंदे मातरम पर कर्नाटक सरकार अडिग, डीके शिवकुमार बोले- 2 पद ही गाए जाएंगे

by admin@bebak24.com on | 2026-08-27 12:04:39

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वंदे मातरम पर कर्नाटक सरकार अडिग, डीके शिवकुमार बोले- 2 पद ही गाए जाएंगे

बेंगलुरु | बेबाक24 न्यूज़

वंदे मातरम के पूर्ण गायन को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच जारी राजनीतिक टकराव कर्नाटक तक पहुंच गया है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने साफ किया है कि सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम के शुरुआती 2 पद ही गाए जाएंगे। उन्होंने कांग्रेस के 1937 के फैसले पर कायम रहने की बात कही है।

शिवकुमार ने क्या कहा?

स्वतंत्रता दिवस समारोह में वंदे मातरम के सभी 6 पद गाए जाने के सवाल पर शिवकुमार ने कहा कि यह उनकी जानकारी के बिना हुआ था। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में सरकारी कार्यक्रमों में पार्टी के तय रुख के अनुसार शुरुआती 2 पद ही गाए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वह कांग्रेस की विचारधारा में विश्वास रखते हैं और पार्टी ने जो फैसला किया है, उस पर कायम रहेंगे। उन्होंने भाजपा पर भी राजनीतिक तुष्टीकरण का आरोप लगाया और कहा कि कांग्रेस देश की विविधता में विश्वास करती है।

भाजपा ने बोला हमला

शिवकुमार के बयान पर भाजपा नेता गौरव वल्लभ ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा राष्ट्रगीत के अपमान जैसी स्थिति पैदा करना गंभीर मामला है।

वल्लभ ने दावा किया कि कांग्रेस का यह रुख एक विशेष धार्मिक समुदाय को खुश करने की राजनीति से प्रेरित है। उन्होंने चेतावनी दी कि जनता इस मुद्दे को गंभीरता से देख रही है और आने वाले चुनावों में इसका राजनीतिक असर पड़ सकता है।

क्या है कांग्रेस का 1937 वाला फैसला?

कांग्रेस कार्य समिति ने हाल में 1937 के अपने उस फैसले को दोहराया था, जिसके तहत सार्वजनिक और राष्ट्रीय कार्यक्रमों में वंदे मातरम के शुरुआती 2 पद गाने की बात कही गई थी। भाजपा इस फैसले का विरोध कर रही है और वंदे मातरम के सभी पदों के सम्मान और गायन पर जोर दे रही है।

इस मुद्दे को लेकर दोनों दलों के बीच देश के कई हिस्सों में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।

विवाद क्यों बढ़ रहा है?

भाजपा का कहना है कि वंदे मातरम स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रीय चेतना की महत्वपूर्ण विरासत है, जबकि कांग्रेस अपने 1937 के फैसले को ऐतिहासिक और राजनीतिक संदर्भ में उचित ठहरा रही है।

कर्नाटक में मुख्यमंत्री के ताजा बयान के बाद साफ है कि यह विवाद केवल संसद या पार्टी मंच तक सीमित नहीं रहने वाला। आने वाले दिनों में इसे लेकर सियासी टकराव और तेज होने की संभावना है।

बेबाक24 नजर: वंदे मातरम पर बहस अब केवल गायन के तरीके तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह संविधान, परंपरा, विविधता और राजनीतिक विचारधाराओं के टकराव का मुद्दा बनती जा रही है। कर्नाटक सरकार का रुख भाजपा-कांग्रेस के बीच इस विवाद को और धार दे सकता है।



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