by on | 2026-07-07 20:30:46
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वायनाड/तिरुवनंतपुरम ब्यूरो (बेबाक24): केरल के वायनाड जिले से एक बेहद दर्दनाक और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। कोझिकोड और वायनाड को जोड़ने के लिए बनाई जा रही करीब 9 किलोमीटर लंबी ट्विन टनल (Twin Tunnel) रोड के निर्माण स्थल पर खुदाई के दौरान अचानक मिट्टी धंसने से एक बड़ा हादसा हो गया है।
इस हादसे में अब तक एक व्यक्ति की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि मलबे में फंसे सात अन्य लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। राहत की बात यह है कि अब तक सात लोगों को मलबे से सुरक्षित निकालकर नजदीकी अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है। मिट्टी धंसने की रफ्तार इतनी तेज थी कि मजदूरों को साइट तक लाने वाली एक खाली बस भी मलबे में पूरी तरह दब गई।
यह हादसा उस वक्त हुआ जब इंजीनियर और निर्माण कर्मी कोझिकोड के अनाकम्पॉयिल को वायनाड के कल्लाडी से जोड़ने वाली 9 किलोमीटर लंबी ट्विन टनल के काम में जुटे थे।
परियोजना का उद्देश्य: इस टनल रोड का मुख्य उद्देश्य दोनों जिलों के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर करना और खतरनाक घुमावदार पहाड़ी मोड़ों (Ghat Roads) से बचना है।
निर्माण एजेंसी: इस टनल का निर्माण केंद्र सरकार की एक एजेंसी की देखरेख में चल रहा है, जिसने जमीन पर काम का ठेका एक निजी कंपनी (Private Contractor) को सौंप रखा है।
केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने तिरुवनंतपुरम में मीडिया से बात करते हुए इस हादसे को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने राहत कार्यों की जानकारी देते हुए निर्माण कंपनी की बड़ी लापरवाही का भी पर्दाफाश किया:
मुख्यमंत्री वीडी सतीशन का बयान:
"एनडीआरएफ (NDRF) की एक टीम मौके पर पहुंच चुकी है और दूसरी टीम भी जल्द ही वहां लैंड करेगी। फायर एंड रेस्क्यू, स्थानीय पुलिस और अन्य प्रशासनिक एजेंसियां घायलों के इलाज और मलबे से लोगों को निकालने में जुटी हैं। लेकिन सबसे गंभीर बात यह है कि बीते 20 जून को ही राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और जिला कलेक्टर ने इस संवेदनशील इलाके से जमा की गई मिट्टी को तुरंत हटाने का सख्त आदेश दिया था। शुरुआती जांच के मुताबिक, टनल का काम कर रहे ठेकेदारों ने कलेक्टर और आपदा प्रबंधन के इस आदेश का पालन नहीं किया, जो इस हादसे की मुख्य वजह बना।"
वायनाड के कल्पेट्टा से विधायक और राज्य के कृषि मंत्री टी. सिद्दीक ने इस घटना को लेकर निर्माण कंपनी पर सीधा आपराधिक लापरवाही का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा:
मिट्टी का अवैध ढेर: यह कोई प्राकृतिक भूस्खलन (Natural Landslide) नहीं है। यह सीधे तौर पर टनल निर्माण के दौरान कटी और निकाली गई मिट्टी के खिसकने की घटना है।
लापरवाही: खुदाई से निकली भारी-भरकम मिट्टी को नियमों के खिलाफ निर्माण स्थल के आसपास ही बड़े-बड़े ढेर लगाकर छोड़ दिया गया था, जिसने ढलान पर दबाव बढ़ा दिया।
265 मिमी रिकॉर्ड बारिश ने बिगाड़ा खेल: केरल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के मुताबिक, इलाके में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण कल से ही टनल का निर्माण कार्य एहतियातन रोक दिया गया था। पिछले 24 घंटों में इस क्षेत्र में करीब 265 मिलीमीटर की रिकॉर्ड तोड़ बारिश दर्ज की गई थी, जिसने डंप की गई मिट्टी को पूरी तरह गीला और दलदली बना दिया, जिसके बाद यह पूरा मलबा नीचे की तरफ धंस गया।
वायनाड का यह टनल हादसा एक बार फिर विकास की आड़ में पर्यावरण और सुरक्षा नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले ठेकेदारों के क्रूर चेहरे को बेनकाब करता है। जब राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और जिला कलेक्टर ने 20 जून को ही लिखित आदेश जारी कर दिया था कि टनल की खुदाई से निकली मिट्टी को वहां से तुरंत हटाया जाए, तो उस मलबे को वहीं पहाड़ी ढलान पर क्यों सड़ने और भारी होने के लिए छोड़ दिया गया? 265 मिलीमीटर की भारी बारिश की चेतावनी के बावजूद ठेकेदारों की इस सुस्ती ने आज एक बेकसूर की जान ले ली और 7 लोग जिंदगी और मौत के बीच मलबे में जंग लड़ रहे हैं।
'बेबाक24' का मानना है कि इस मामले में केवल 'दुर्भाग्यपूर्ण हादसा' कहकर फाइल को बंद नहीं किया जाना चाहिए। केंद्र सरकार की जिस एजेंसी ने इस निजी कंपनी को ठेका दिया था, उसकी भी यह जिम्मेदारी बनती थी कि वह सुरक्षा ऑडिट करे। मुख्यमंत्री वीडी सतीशन के बयान के बाद यह साफ है कि यह एक प्रशासनिक और कॉर्पोरेट हत्या का मामला है। निर्माण कंपनी के मालिकों और ठेकेदारों पर तुरंत गैर-इरादतन हत्या (धारा 105, बीएनएस) का मुकदमा दर्ज होना चाहिए। पहाड़ों को खोदकर टनल बनाना कूटनीतिक रूप से कनेक्टिविटी के लिए जरूरी हो सकता है, लेकिन इंसानी जिंदगियों की कीमत पर ऐसा विकास किसी नरक से कम नहीं है।
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