by on | 2026-07-07 20:11:48
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चंडीगढ़/अमृतसर ब्यूरो (बेबाक24): मशहूर पंजाबी स्टार दिलजीत दोसांझ (Diljit Dosanjh) की बहुचर्चित फिल्म 'सतलुज' (Satluj) को ओटीटी प्लेटफॉर्म ज़ी-5 (Zee5) से हटाए जाने का मामला अब एक बड़े राजनीतिक विवाद में तब्दील हो चुका है। मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित यह फिल्म रिलीज के महज दो दिन बाद ही प्लेटफॉर्म से गायब हो गई, जिसके बाद पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा और खुद अभिनेता दिलजीत दोसांझ ने इस सेंसरशिप पर बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी है।
पंजाब सरकार के वरिष्ठ मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने इस प्रतिबंध को पूरी तरह से गलत ठहराते हुए समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) से कहा:
हरपाल सिंह चीमा का आधिकारिक बयान:
"साल 1992 से 1997 के बीच पंजाब में कांग्रेस सरकार के शासनकाल के दौरान राज्य के युवाओं पर बेतहाशा अत्याचार हुए थे। उन ऐतिहासिक और दर्दनाक घटनाओं को ईमानदारी से दिखाने वाली फिल्म पर प्रतिबंध लगाना बिल्कुल गलत और अलोकतांत्रिक है। ऐसा साफ प्रतीत होता है कि अकाली दल, बीजेपी और कांग्रेस पर्दे के पीछे आपस में मिल चुके हैं, क्योंकि यह फिल्म इन तीनों ही राजनीतिक पार्टियों के काले और कच्चे चिट्ठे को जनता के सामने उजागर करती है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे पंजाब के नौजवानों को निशाना बनाया जाता था और उन्हें मारा जाता था।"
चीमा ने आगे दिलजीत दोसांझ की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने पंजाब के इतिहास पर एक बेहद अच्छी और सच्ची फिल्म बनाई है, जिसे बैन करना पूरी तरह गलत है। सरकार को इसे तुरंत दोबारा रिलीज करने की अनुमति देनी चाहिए।
फिल्म को हटाए जाने के बाद अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ ने डिजिटल माध्यमों पर अपनी गहरी निराशा और गुस्सा जाहिर किया है। उन्होंने इस आधुनिक दौर की सेंसरशिप पर सवाल उठाते हुए कहा:
आवाज दबाने का आरोप: "मुझे पहले से ही अंदेशा था कि ऐसा ही कुछ होगा। कमाल की बात देखिए, जिस शख्स (जसवंत सिंह खालड़ा) की आवाज को साल 1995 में दबाया गया था, आज साल 2026 में भी उसी आवाज को दबाने की कोशिश हो रही है। हद हो गई है!"
2026 के दौर पर सवाल: दोसांझ ने आगे कहा— "हम आज 2026 में जी रहे हैं, लेकिन हमारी सोच कहां खड़ी है? आज भी आप लोगों को सच पर बात नहीं करने दे रहे हो। इस फिल्म में कोई मनगढ़ंत कहानी नहीं है, बल्कि कोर्ट (عدالت) ने जो ऐतिहासिक फैसले दिए हैं, हम सिर्फ उसी सच पर बात कर रहे हैं। फिर भी इसे हटाना मेरी समझ से पूरी तरह बाहर है।"
जनता की फिल्म: हालांकि, दिलजीत ने यह भी साफ किया कि वे खुश हैं कि यह फिल्म रिलीज के दो दिनों में ही कुछ लोगों तक पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि यह अब जनता की फिल्म बन चुकी है और सच को अब रोका नहीं जा सकता।
मानवाधिकारों के लिए लड़ने वाले जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और पंजाब के काले दौर के सच को बयां करती फिल्म 'सतलुज' 3 जुलाई 2026 को ओटीटी प्लेटफॉर्म ज़ी-5 पर रिलीज की गई थी। लेकिन रिलीज के ठीक दो दिन बाद, यानी 5 जुलाई 2026 को इसे बिना किसी पूर्व सूचना या स्पष्टीकरण के प्लेटफॉर्म से पूरी तरह हटा (Take down) दिया गया। कूटनीतिक हलकों में चर्चा है कि फिल्म के राजनीतिक कंटेंट को लेकर कुछ संगठनों और राजनीतिक दलों के दबाव के बाद यह कदम उठाया गया है।
फिल्म 'सतलुज' का इस तरह रिलीज के महज 48 घंटे के भीतर ओटीटी से गायब हो जाना भारतीय मनोरंजन उद्योग में अभिव्यक्ति की आजादी पर एक और बड़ा और चिंताजनक सवालिया निशान है। दिलजीत दोसांझ का यह कहना बिल्कुल तर्कसंगत है कि जब फिल्म अदालतों के दस्तावेजों और ऐतिहासिक फैसलों पर आधारित है, तो 2026 के इस आधुनिक और डिजिटल युग में भी किसी की आवाज को सेंसर करने की इतनी हड़बड़ी क्यों है? जसवंत सिंह खालड़ा का इतिहास पंजाब का एक ऐसा सच है जिसे दबाया नहीं जा सकता।
'बेबाक24' का मानना है कि पंजाब के मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने जो आरोप लगाए हैं, वे राज्य की कड़वी राजनीतिक खींचतान को दर्शाते हैं। यदि कोई फिल्म 90 के दशक के पंजाब के काले सच, पुलिसिया दमन और राजनीतिक दलों की भूमिका को दिखाती है, तो उसे सेंसर करने के बजाय जनता के विवेक पर छोड़ दिया जाना चाहिए कि वे क्या सही मानते हैं और क्या गलत। कॉर्पोरेट ओटीटी प्लेटफॉर्म्स का राजनीतिक दबावों के आगे इस तरह घुटने टेक देना कला और इतिहास दोनों के साथ अन्याय है। 'सतलुज' को हटाने से फिल्म की चर्चा रुकी नहीं है, बल्कि इसने इसे देखने की उत्सुकता को दोगुना कर दिया है।
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