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बागियों के गढ़ में उद्धव: 'गद्दारों' को टिकट देने पर जनता से मांगेंगे माफी

by on | 2026-06-22 21:28:45

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बागियों के गढ़ में उद्धव: 'गद्दारों' को टिकट देने पर जनता से मांगेंगे माफी

मुंबई: महाराष्ट्र की सियासत में 'ऑपरेशन टाइगर' के जरिए लगे बड़े झटके के बाद शिवसेना-यूबीटी (Shivsena-UBT) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है. अपनी पार्टी के छह लोकसभा सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने के बाद, उद्धव ठाकरे आगामी 27 से 29 जून तक उन सभी बागी सांसदों के निर्वाचन क्षेत्रों का तूफानी दौरा करने जा रहे हैं.

लोकसभा चुनाव के ठीक बाद पार्टी के भीतर लगी इस बड़ी सेंध के जवाब में उद्धव ठाकरे का यह पहला, सबसे आक्रामक और एक अनोखा रणनीतिक कदम माना जा रहा है.

जनता की अदालत में भावुक दांव: 'गलत उम्मीदवार चुनने के लिए मुझे माफ करें'

शिवसेना-यूबीटी को लगे इस करारे झटके के बाद उद्धव ठाकरे ने मतदाताओं के साथ सीधा भावनात्मक संबंध जोड़ने के लिए एक बड़ा सियासी दांव खेला है. ठाकरे ने एलान किया है कि वे इन सभी क्षेत्रों की जनता के बीच जाएंगे और वर्ष 2024 के आम चुनाव में इन दलबदलू सांसदों को टिकट देने और उनके लिए वोट मांगने के फैसले पर सार्वजनिक रूप से हाथ जोड़कर माफी मांगेंगे.

राज्यसभा सांसद और 'सामना' के कार्यकारी संपादक संजय राउत द्वारा जारी आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, इस तीन दिवसीय दौरे के जरिए जमीन पर मौजूद शिवसैनिकों और कार्यकर्ताओं को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले दोबारा एकजुट किया जाएगा.

यवतमाल से शुरुआत, शिरडी में अंतिम हुंकार: जानिए पूरा शेड्यूल

इस महादौरे को सफल बनाने के लिए उद्धव ठाकरे ने अपने सबसे भरोसेमंद शीर्ष नेताओं को मैदान में उतारा है:

  • 27 जून (पहला दिन) - यवतमाल, वाशिम और हिंगोली: उद्धव ठाकरे अपने शक्ति प्रदर्शन की शुरुआत यवतमाल से करेंगे, जहाँ अरविंद सावंत और जिला प्रमुख प्रवीण शिंदे तैयारियों की कमान संभाल रहे हैं. इसके बाद वे वाशिम होते हुए दोपहर को हिंगोली पहुंचेंगे, जहाँ अंबादास दानवे व्यवस्था देख रहे हैं. पहले दिन का समापन परभणी में होगा, जहाँ ठाकरे रात्रि विश्राम करेंगे.

  • 28 जून (दूसरा दिन) - परभणी और धाराशिव: परभणी में जनसभा और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करने के बाद ठाकरे दोपहर में धाराशिव के लिए रवाना होंगे. यहाँ की जिम्मेदारी विधायक कैलाश पाटिल के पास है. इस दिन का समापन छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) में रात्रि विश्राम के साथ होगा.

  • 29 जून (तीसरा दिन) - शिरडी में अंतिम हुंकार: दौरे के आखिरी दिन उद्धव ठाकरे शिरडी लोकसभा क्षेत्र का दौरा करेंगे. इस बेहद महत्वपूर्ण चरण की कमान खुद संजय राउत और सुनील शिंदे ने संभाल रखी है. शिरडी में शक्ति प्रदर्शन के बाद ठाकरे वापस मुंबई लौट आएंगे.

इन 6 बागी सांसदों के खिलाफ खोला मोर्चा

यह पूरी सियासी सरगर्मी पिछले सप्ताह शिवसेना-यूबीटी के उन 6 बड़े सांसदों के विद्रोह के बाद शुरू हुई है, जिन्होंने पाला बदलकर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना की सदस्यता ले ली है. इनमें शामिल हैं:

  1. ओमराजे निंबालकर (धाराशिव)

  2. संजय पाटिल (मुलुंड उत्तर पूर्व)

  3. संजय जाधव (परभणी)

  4. संजय देशमुख (यवतमाल)

  5. नागेश पाटिल आष्टीकर (हिंगोली)

  6. भाऊसाहेब वाकचौरे (शिरडी)

बेबाक24 टेक

उद्धव ठाकरे का 'जनता से माफी मांगने' का यह फॉर्मूला राजनीतिक रूप से बेहद चतुर और धारदार है. राजनीति में अमूमन नेता अपनी गलती स्वीकार करने से बचते हैं, लेकिन उद्धव यहाँ मतदाताओं के सामने खुद को 'पीड़ित' और बागी सांसदों को 'धोखेबाज' के रूप में पेश कर रहे हैं. जनता के बीच जाकर यह कहना कि "मुझसे उम्मीदवार चुनने में गलती हुई, मुझे माफ करें", मतदाताओं के भीतर शिंदे गुट के प्रति एक नैतिक गुस्सा पैदा करने की कोशिश है.

रणनीतिक दृष्टिकोण से देखें तो 'ऑपरेशन टाइगर' के जरिए एकनाथ शिंदे ने भले ही उद्धव के 6 सांसदों को तोड़कर संसद में अपनी ताकत बढ़ा ली हो, लेकिन असली परीक्षा आगामी महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में होनी है. उद्धव जानते हैं कि अगर वे इन 6 लोकसभा क्षेत्रों के कैडर (जमीनी कार्यकर्ताओं) को बिखरने से बचाने में कामयाब रहे, तो वे विधानसभा चुनावों में शिंदे गुट को तगड़ी शिकस्त दे सकते हैं. संयुक्त शिवसेना के स्थापना दिवस पर पद छोड़ने की भावुक पेशकश करने के बाद, उद्धव का यह जमीनी दौरा महाराष्ट्र की राजनीति को 'ठाकरे बनाम शिंदे' की सबसे आक्रामक और अंतिम जंग की ओर ले जा रहा है.



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