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मेडिकल कॉलेज या 'अंधेर नगरी'? जहाँ चोट कहीं और, पट्टी कहीं और!

by on | 2026-04-14 00:25:22

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मेडिकल कॉलेज या 'अंधेर नगरी'? जहाँ चोट कहीं और, पट्टी कहीं और!


​गाजीपुर। 'डॉक्टर धरती का भगवान होता है'— यह कहावत आपने सुनी होगी, लेकिन गाजीपुर के महर्षि विश्वामित्र मेडिकल कॉलेज में आकर यह परिभाषा बदल चुकी है। यहाँ डॉक्टर साहबान ने अपनी 'लापरवाही की दूरबीन' से वो करिश्मा कर दिखाया है कि मेडिकल साइंस भी शर्म से पानी-पानी हो जाए। बायां पैर टूटा था, तो क्या हुआ? प्लास्टर तो दाएं पैर पर भी चढ़ सकता है!
​सिस्टम की 'पट्टी' और मरीज की बेबसी
​घटना सुहवल थाना क्षेत्र के विमलेश सिंह की है। बेचारे सड़क हादसे में घायल होकर इस उम्मीद में अस्पताल आए थे कि दर्द से निजात मिलेगी। लेकिन उन्हें क्या पता था कि यहाँ उनका सामना उन 'हुक्मरानों' से होगा जिन्हें इंसान और मशीन के बीच का फर्क ही नहीं पता। विमलेश चीखते रहे— "साहब, दर्द बाएं पैर में है," लेकिन डॉक्टर साहब तो अपनी ही धुन में सवार थे। उन्होंने वह पैर बांध दिया जो बिल्कुल सलामत था।
​क्या रात भर 'कोमा' में था अस्पताल प्रशासन?
​सवाल यह उठता है कि पूरी रात विमलेश दर्द से कराहते रहे, लेकिन वार्ड में तैनात 'सफेद कोट' वाले क्या कान में रुई डालकर सो रहे थे? क्या किसी भी सीनियर डॉक्टर या स्टाफ ने यह जहमत नहीं उठाई कि एक बार पट्टी खोलकर देख लें? सुबह जब परिजनों ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया, तब जाकर प्रशासन की 'कुंभकर्णी नींद' टूटी। क्या अब इलाज के लिए भी वीडियो का वायरल होना जरूरी है?
​प्राचार्य की दलील: गलती नहीं, 'कवर-अप' की कोशिश!
​मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य आनंद मिश्रा का बयान तो और भी हैरान करने वाला है। वो कहते हैं कि "दाएं पैर में भी चोट थी।" वाह! क्या गजब का तर्क है। मतलब अगर सिर में दर्द हो, तो क्या आप पैर में पट्टी बांध देंगे? एक्स-रे रिपोर्ट आने का इंतजार किए बिना 'अंदाजे' से इलाज करना क्या किसी की जान के साथ खिलवाड़ नहीं है?
बेबाक 24 की दो टूक:
मेडिकल कॉलेज की डिग्री क्या केवल दीवारों पर टांगने के लिए है? अगर एक डॉक्टर को 'दाएं' और 'बाएं' का अंतर नहीं पता, तो उसे ऑपरेशन थिएटर में जाने का हक किसने दिया? यह लापरवाही नहीं, बल्कि एक गरीब मरीज के भरोसे का कत्ल है।
​सावधान गाजीपुर! यहाँ अस्पताल जाने से पहले खुद ही अपनी चोट पर निशान लगा लीजिएगा, क्योंकि यहाँ के डॉक्टरों को शायद अब 'नक्शे' की जरूरत है!



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