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ज़हुराबाद में शादाब फातिमा की हुंकार: सनेहुआ में अंबेडकर जयंती पर दिखाया दम, विरोधियों के दांत खट्टे करने की तैयारी!

by on | 2026-04-15 14:52:30

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ज़हुराबाद में शादाब फातिमा की हुंकार: सनेहुआ में अंबेडकर जयंती पर दिखाया दम, विरोधियों के दांत खट्टे करने की तैयारी!

बेबाक 24 न्यूज़ नेटवर्क


गाजीपुर (ज़हुराबाद): पूर्वांचल की सियासत में अपनी बेबाक पहचान रखने वाली पूर्व मंत्री और सपा की कद्दावर नेत्री शादाब फातिमा की सक्रियता ने ज़हुराबाद का सियासी पारा चढ़ा दिया है। बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती के मौके पर सनेहुआ ग्राम में आयोजित भव्य कार्यक्रम में जब शादाब फातिमा पहुँचीं, तो जनता का उत्साह देखते ही बन रहा था।

विकास की 'बाट' जोह रही जनता, याद आया पुराना कार्यकाल

​सनेहुआ की धरती पर बाबा साहेब की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते हुए शादाब फातिमा ने न केवल संविधान शिल्पी को नमन किया, बल्कि इशारों-इशारों में विरोधियों को अपनी ताकत का अहसास भी करा दिया। क्षेत्र में चर्चा आम है कि अपने मंत्री काल के दौरान उन्होंने विकास की जो गंगा बहाई थी, आज जनता फिर से उसी विजन की तलाश कर रही है। साफगोई और स्पष्ट विचारों की धनी शादाब फातिमा की बढ़ती सक्रियता अब सीधे तौर पर ओमप्रकाश राजभर के अभेद्य किले में सेंध लगाती दिख रही है। जानकारों की मानें तो आने वाले समय में वह विरोधियों के 'दांत खट्टे' करने की पूरी तैयारी में हैं।

प्रमुख सुर्खियां:

  • संविधान की रक्षा सर्वोपरि: ग्रामीणों को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री ने कहा कि बाबा साहेब का दिया हुआ संविधान ही हर नागरिक की ढाल है। आज के दौर में जब संवैधानिक मूल्यों पर खतरा मंडरा रहा है, तब एकजुट होकर इसे बचाना ही डॉ. अंबेडकर को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
  • शिक्षा से ही संभव है क्रांति: उन्होंने बाबा साहेब के मूल मंत्र 'शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो' को दोहराते हुए कहा कि दलितों और पिछड़ों के उत्थान का रास्ता सिर्फ और सिर्फ शिक्षा के बंद दरवाजों से होकर गुजरता है।
  • नीले रंग में रंगा सनेहुआ: कार्यक्रम के दौरान दलित बस्ती में जबरदस्त उत्साह दिखा। 'जय भीम' के नारों और नीले झंडों के बीच शादाब फातिमा की मौजूदगी ने सामाजिक समीकरणों को एक नई दिशा देने का संकेत दिया है।
  • बेबाक टिप्पणी:

    ज़हुराबाद की सियासत अब करवट ले रही है। एक तरफ वर्तमान की चुनौतियां हैं और दूसरी तरफ शादाब फातिमा के कार्यकाल का वो विकास, जिसे जनता आज भी याद करती है। सनेहुआ की यह भीड़ सिर्फ जयंती समारोह का हिस्सा नहीं थी, बल्कि यह आने वाले बड़े राजनीतिक बदलाव की आहट भी हो सकती है।



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