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ट्रंप का 'होर्मुज' पर बड़ा एलान: "टोल देकर गुजरने वाले जहाजों को भी रोकेगी अमेरिकी नौसेना"; इस्लामाबाद शांति वार्ता विफल, ईरान पर माइन्स बिछाने का आरोप

by on | 2026-04-12 21:44:21

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ट्रंप का 'होर्मुज' पर बड़ा एलान: "टोल देकर गुजरने वाले जहाजों को भी रोकेगी अमेरिकी नौसेना"; इस्लामाबाद शांति वार्ता विफल, ईरान पर माइन्स बिछाने का आरोप

वॉशिंगटन |  अमेरिका और ईरान के बीच जारी गतिरोध अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। पाकिस्तान के इस्लामाबाद में हुई 20 घंटे लंबी शांति वार्ता के विफल होने के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ 'आर्थिक और सैन्य नाकेबंदी' का संकेत दे दिया है। ट्रंप ने साफ कर दिया है कि ईरान की "ब्लैकमेलिंग" अब और बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

1. होर्मुज की नाकेबंदी और अमेरिकी नौसेना का एक्शन

ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट के जरिए वैश्विक व्यापार को लेकर कड़ा रुख अपनाया है:

जहाजों की निगरानी: ट्रंप ने अमेरिकी नौसेना को आदेश दिया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले हर जहाज की निगरानी की जाए।

टोल देने वालों पर रोक: राष्ट्रपति ने कड़े शब्दों में कहा कि ईरान को टोल देकर इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों को भी अमेरिकी नौसेना रोकेगी। जब तक सुरक्षा की पूरी गारंटी नहीं मिलती, यह पाबंदी जारी रहेगी।

माइन्स का खतरा: ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरान ने समुद्र में बारूदी सुरंगें (Mines) बिछाई हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार ठप हो गया है और जहाज मालिक जोखिम लेने से डर रहे हैं।

2. क्यों फेल हुई इस्लामाबाद शांति वार्ता?

20 घंटे चली इस मैराथन बैठक में कई मुद्दों पर सहमति तो बनी, लेकिन सबसे बड़ा पेंच परमाणु कार्यक्रम पर फंसा:

परमाणु हथियारों पर नो-कॉम्प्रोमाइज: ट्रंप ने स्पष्ट कहा, "ईरान को कभी भी परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी।" चूंकि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए तैयार नहीं हुआ, इसलिए बातचीत बेनतीजा रही।

ईरान का पक्ष: ईरान के मजलिस अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका पर भरोसा न होने के कारण वार्ता विफल हुई।

3. पुतिन की मध्यस्थता की पेशकश और जयशंकर का दौरा

रूस का रुख: बढ़ते तनाव के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान के राष्ट्रपति से फोन पर बात की और मध्यस्थ (Mediator) की भूमिका निभाने का प्रस्ताव रखा है।

भारत की भूमिका: विदेश मंत्री एस. जयशंकर का यूएई दौरा इस संकट के बीच काफी अहम माना जा रहा है। वे न केवल भारतीय समुदाय से मिल रहे हैं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा और खाड़ी क्षेत्र में शांति को लेकर भी चर्चा कर रहे हैं।



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