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वाराणसी JD की चढ़ी त्यौरी, गाजीपुर DIOS ऑफिस में मचा हड़कंप: 1.30 करोड़ के 'बंदरबाँट' की मांगी आख्या!

by on | 2026-03-10 08:32:54

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वाराणसी JD की चढ़ी त्यौरी, गाजीपुर DIOS ऑफिस में मचा हड़कंप: 1.30 करोड़ के 'बंदरबाँट' की मांगी आख्या!

​गाजीपुर/वाराणसी: सरकारी तिजोरी को अपनी जागीर समझने वाले 'हाकिमों' की रातों की नींद अब उड़ने वाली है। गाजीपुर DIOS ऑफिस में कंटिंजेंसी बजट के नाम पर हुए 1 करोड़ 30 लाख रुपये मे घोटाले की परतें अब दरकनी शुरू हो गई हैं। भ्रष्टाचार की इस 'पटकथा' को इतनी बारीकी से लिखा गया था कि किसी को भनक न लगे, लेकिन अब साहबों की गिरेबान कानून के शिकंजे में फंसती नजर आ रही है।
​नियमों की उड़ी धज्जियां, 'अंधेर नगरी' में बंटा करोड़ों का माल!
​सरकारी कायदा चीख-चीख कर कहता है कि 25 हजार रुपये से ऊपर की किसी भी खरीद के लिए ई-टेंडर अनिवार्य है। लेकिन गाजीपुर में तो जैसे 'अपना राज' चल रहा था। बिना किसी विज्ञापन, बिना किसी टेंडर के ही सवा करोड़ से अधिक की रकम मे गडबड़ झाला कर दिया गया। फर्नीचर और कार्यालय खर्च के नाम पर हुई इस बंदरबाँट ने विभाग की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
​'बाबू' से लेकर 'साहब' तक पसीने-पसीने
​जैसे ही घोटाले की फाइलें बाहर आईं, विभाग के गलियारों में सन्नाटा पसर गया है। साल 2025-26 की योजना के तहत जिले के राजकीय विद्यालयों के विकास के लिए आई इस भारी-भरकम राशि को बिना किसी पारदर्शिता के 'डकार' लिया गया। अब जांच की आंच जैसे-जैसे करीब आ रही है, दफ्तर के बड़े बाबू और साहबान सफाई देने के बहाने ढूंढ रहे हैं।
​वाराणसी JD का कड़ा रुख: 'फाइल दबेगी नहीं, दोषी बचेंगे नहीं'
​इस पूरे मामले पर वाराणसी के संयुक्त शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) दिनेश सिंह पूरी तरह एक्शन मोड में हैं। उनकी त्यौरियां चढ़ी देख भ्रष्टाचारियों में खलबली मच गई है। उन्होंने स्पष्ट लहजे में चेतावनी दे दी है कि भ्रष्टाचार के इस खेल को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
​"मामला गंभीर है और मेरे संज्ञान में आ चुका है। DIOS प्रकाश सिंह से तत्काल विस्तृत आख्या (रिपोर्ट) तलब की गई है। इस पूरे गबन की जांच के लिए एक विशेष कमेटी गठित होगी। एक 'बाबू' का नाम भी रडार पर है। जांच में जो भी दोषी पाया गया, उस पर ऐसी कार्रवाई होगी कि नजीर बनेगी।"
दिनेश सिंह, जॉइंट डायरेक्टर (माध्यमिक शिक्षा), वाराणसी
​बेबाक टिप्पणी: विद्यालयों के विकास के पैसे पर कुंडली मारकर बैठे इन 'सरकारी अजगरों' का हिसाब होना तय है। सवाल यह है कि क्या सिर्फ एक 'बाबू' को बलि का बकरा बनाकर बड़े खिलाड़ियों को बचा लिया जाएगा, या फिर गाजीपुर से वाराणसी तक फैले इस भ्रष्टाचार के सिंडिकेट को ध्वस्त किया जाएगा? बेबाक 24 की नजर इस जांच की हर एक फाइल पर टिकी है।

​बने रहिए 'बेबाक 24' के साथ— बेखौफ अंदाज, बेबाक खबर!



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