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बीमार शेर पर 'सरकारी' वार! कैंसर से लड़ रहे उमाशंकर सिंह के घर IT की 'फौज', क्या ये महज इत्तेफाक है?

by on | 2026-02-25 15:43:03

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बीमार शेर पर 'सरकारी' वार! कैंसर से लड़ रहे उमाशंकर सिंह के घर IT की 'फौज', क्या ये महज इत्तेफाक है?

संतोष राय
​बेबाक विश्लेषण (बलिया/लखनऊ): कहते हैं राजनीति में 'टाइमिंग' ही सब कुछ होती है। उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी का आखिरी चिराग बुझाने की कोशिश है या फिर वाकई काला धन खंगालने की कवायद? रसड़ा विधायक उमाशंकर सिंह, जो इस वक्त कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से जंग लड़ रहे हैं, उनके दरवाजे पर आयकर विभाग की '50 अफसरों की फौज' खड़ी है।
​जब शरीर साथ न दे रहा हो, तब सरकारी तंत्र का यह प्रहार कई सवाल खड़े करता है। चलिए, इस 'छापेमारी' की खाल खींचते हैं और जानते हैं उमाशंकर सिंह का वो रसूख, जिससे सत्ता की नींद उड़ी रहती है।
​कौन हैं उमाशंकर सिंह? बसपा का वो 'अंगद का पैर' जिसे कोई हिला न सका
​उमाशंकर सिंह सिर्फ एक विधायक नहीं, बल्कि मायावती की गिरती साख के बीच वो 'अकेला किला' हैं जिसे भाजपा या सपा की लहरें भी नहीं ढहा सकीं।
​अजेय योद्धा: 2022 के विधानसभा चुनाव में जब हाथी (BSP) पूरे यूपी में पस्त हो गया, तब बलिया की रसड़ा सीट पर उमाशंकर सिंह ने जीत की हैट्रिक लगाई। वह आज विधानसभा में बसपा के इकलौते नुमाइंदे हैं।
​अर्श से फर्श तक का सफर: एक साधारण परिवार से निकलकर यूपी के सबसे अमीर विधायकों की सूची में शुमार होने वाले उमाशंकर सिंह ने ठेकेदारी (Chhatrashakti Construction) के जरिए अपना साम्राज्य खड़ा किया।
​गरीबों का 'रॉबिनहुड': रसड़ा में उनकी पहचान एक ऐसे नेता की है जो आधी रात को भी मदद के लिए तैयार रहता है। अपनी निजी कोष से उन्होंने हजारों लड़कियों की शादी और गरीबों का इलाज कराया है। शायद यही वजह है कि जनता उन्हें 'पार्टी' देखकर नहीं, 'नाम' देखकर वोट देती है।
​छापेमारी की 'इनसाइड स्टोरी': आखिर निशाने पर क्यों?
​आयकर विभाग की टीम ने लखनऊ और बलिया स्थित उनके ठिकानों पर जिस तरह से घेराबंदी की है, उसकी 3 बड़ी वजहें चर्चा में हैं:
​कंस्ट्रक्शन और टर्नओवर: उनकी कंपनियों का बढ़ता टर्नओवर और पुराने प्रोजेक्ट्स के दस्तावेजों में 'झोल' की आशंका।
​चुनावी हलफनामा: 2022 में दी गई संपत्ति की जानकारी और असल निवेश के बीच का अंतर विभाग की रडार पर है।
​सियासी कद: विधानसभा में अकेले होने के बावजूद उमाशंकर सिंह सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ते। ऐसे में इस छापे को विपक्ष 'आवाज दबाने' की कोशिश बता रहा है।
​बेबाक 24 की दो टूक: 'बीमारी में जांच या सियासत का नया दांव?'
​कानून अपना काम करता है, इसमें कोई दो राय नहीं। लेकिन सवाल 'इंसानियत' और 'मर्यादा' का है। जब एक विधायक गंभीर रूप से बीमार हो, अस्पताल का चक्कर लगा रहा हो, तब 50 अफसरों का उनके घर में घुसकर फाइलों को पलटना क्या सिर्फ एक वित्तीय जांच है?
​नजरिया: अगर उमाशंकर सिंह ने टैक्स चोरी की है, तो उन पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन अगर यह कार्रवाई सिर्फ इसलिए है क्योंकि वो विपक्ष का 'इकलौता' मुखर चेहरा हैं, तो यह लोकतंत्र के लिए कैंसर से भी ज्यादा खतरनाक है।



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