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कंपनीबाग में 'फूलों का मेला' संपन्न, काशी के 'बागबानों' पर हुई ईनामों की बारिश!

by on | 2026-02-23 10:04:44

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कंपनीबाग में 'फूलों का मेला' संपन्न, काशी के 'बागबानों' पर हुई ईनामों की बारिश!


वाराणसी। शहर के फेफड़े कहे जाने वाले राजकीय अलंकृत उद्यान (कंपनीबाग) में चल रही रंगों और खुशबुओं की जंग रविवार को पूरे दमखम के साथ खत्म हो गई। मौका था मंडलीय शाक-भाजी, फल एवं पुष्प प्रदर्शनी के समापन का, जहां न केवल फूलों की खूबसूरती ने दिल जीता, बल्कि किसानों की मेहनत को 'सम्मान का खाद' भी मिला।

नगर आयुक्त ने परखा हुनर, किसानों को मिला 'भविष्य का बीज'

समारोह में पहुंचे नगर आयुक्त ने प्रदर्शनी का बारीकी से मुआयना किया। उन्होंने एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत चल रही दो दिवसीय कृषक संगोष्ठी का भी समापन किया। सरकार की नीयत साफ दिखी—सिर्फ प्रदर्शनी नहीं, बल्कि किसानों की जेब भरने की तैयारी भी है। इसी कड़ी में 24 लाभार्थी किसानों को मुख्यमंत्री राज्य औद्यानिक मिशन के तहत खीरा और करेले के उन्नत बीज मुफ्त बांटे गए, ताकि अगली फसल और भी 'कड़वी' (मुनाफे में मीठी) हो।

किसे मिला 'किंग' और कौन बनी 'क्वीन'?

प्रदर्शनी में मुकाबला कड़ा था। 14 अलग-अलग वर्गों में 'चल वैजयंती शील्ड' के लिए होड़ मची रही। विजेताओं की लिस्ट देखिए, जो बताती है कि काशी में बागवानी का शौक कितना गहरा है:

श्रेणी : विजेता (विजेता का नाम/संस्थान) किंग ऑफ द शो (गुलाब) : महासंसार नर्सरी 

क्वीन ऑफ द शो (डहेलिया) : न्यू ग्लोबल नर्सरी (प्रीति पटेल) 

शाकभाजी वर्ग :वरिष्ठ अधीक्षक, केंद्रीय कारागार  फल वर्ग : काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) 

कटे मौसमी फूल : प्रभारी, सर्किट हाउस वाराणसी सदाबहार गमले :मंडल रेल प्रबंधक, पूर्वोत्तर रेलवे 

शादी मंडप सज्जा : दिनेश कुमार मौर्य 

अधिकारियों ने थपथपाई पीठ

उपनिदेशक उद्यान दिग्विजय भार्गव ने साफ कहा कि यह जीत सिर्फ नर्सरियों की नहीं, बल्कि उन बच्चों और कर्मचारियों की भी है जिन्होंने सांस्कृतिक कार्यक्रमों से इस आयोजन में जान फूँक दी। वहीं जिला उद्यान अधिकारी सुभाष ने विभाग की योजनाओं का कच्चा-चिट्ठा रखा, तो उद्यान निरीक्षक सुधांशु सिंह ने मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए इस गूँज को घर-घर पहुँचाने के लिए आभार जताया।

बेबाक राय: ऐसी प्रदर्शनियाँ केवल गमलों को सजाने के लिए नहीं, बल्कि किसानों को नई तकनीक से जोड़ने का एक बड़ा जरिया हैं। अगर बीज सही समय पर और तकनीक सही हाथ में पहुँच जाए, तो काशी का हर कोना कंपनीबाग की तरह ही महक सकता है।



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