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विधिक शिविर बना किसानों की 'लाइफलाइन', चौकाघाट में सरकारी योजनाओं की झड़ी!

by on | 2026-02-22 20:58:47

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विधिक शिविर बना किसानों की 'लाइफलाइन', चौकाघाट में सरकारी योजनाओं की झड़ी!

वाराणसी |  जब नीयत साफ हो और प्रशासन सक्रिय, तो सरकारी योजनाएं फाइलों से निकलकर सीधे किसानों की चौखट तक पहुँचती हैं। आज चौकाघाट स्थित पद्मविभूषण गिरिजादेवी संकुल में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। मौका था विशाल विधिक सहायता एवं सेवा शिविर का, जहाँ किसानों को न केवल कानूनी अधिकार समझाए गए, बल्कि उनके हाथों में खेती को स्मार्ट बनाने वाले 'हथियार' भी थमाए गए।

ऑनलाइन बुकिंग और ई-लॉटरी: अब सिफारिश नहीं, किस्मत और तकनीक का बोलबाला

​शिविर में कृषि विभाग के स्टॉल पर उस वक्त हलचल बढ़ गई जब जनपद न्यायाधीश संजीव शुक्ला और जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने मोर्चा संभाला। पारदर्शी व्यवस्था का लोहा मनवाते हुए ई-लॉटरी के जरिए चयनित किसानों को 'जायद 2026' के लिए उर्द और मूंग के नि:शुल्क बीज मिनिकिट बांटे गए।

बेबाक टिप्पणी: गन्ने के साथ अंतः फसली खेती को बढ़ावा देने की यह पहल किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में सिर्फ कागजी दावा नहीं, बल्कि धरातल पर उतरती हकीकत दिखी।


सोलर लाइट ट्रैप: रसायनों की छुट्टी, रोशनी से कीटों पर वार

​शिविर का मुख्य आकर्षण रहा सोलर लाइट ट्रैप। अनुदान पर मिले इस डिवाइस ने किसानों के चेहरे पर चमक ला दी।

  • काम का तरीका: बिना किसी महंगे और जहरीले रसायन के, यह यंत्र हानिकारक कीटों (तना छेदक, इल्ली) को प्रकाश से फंसाकर खत्म कर देता है।
  • फायदा: कीटनाशकों पर होने वाले हजारों के खर्च की बचत और पर्यावरण की सुरक्षा।

मिट्टी की 'सेहत' और खेत का 'तालाब'

​खेती की बुनियाद मिट्टी है, और इसी को ध्यान में रखते हुए भारी संख्या में मृदा स्वास्थ्य कार्ड (Soil Health Card) वितरित किए गए। अब किसान खाद के पीछे अंधाधुंध पैसा नहीं बहाएगा, बल्कि मिट्टी की जरूरत के हिसाब से 'संतुलित आहार' देगा। साथ ही, खेत तालाब योजना के लाभार्थियों को सर्टिफिकेट देकर यह संदेश दिया गया कि जल संचयन ही भविष्य की खेती है।

संवाद से समाधान तक

​अधिकारियों ने केवल मंच से भाषण नहीं दिया, बल्कि किसानों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं। काशी जैविक उत्पाद (FPO) के कार्यों की समीक्षा ने यह साफ कर दिया कि बनारस अब जैविक खेती का हब बनने की ओर अग्रसर है।



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