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कलेक्ट्रेट में 'पावर पैक्ड' बैठक: वकीलों के तेवर और डीएम का एक्शन! कचहरी से तहसील तक सुधार का 'ब्लूप्रिंट' तैयार

by on | 2026-02-21 23:26:06

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कलेक्ट्रेट में 'पावर पैक्ड' बैठक: वकीलों के तेवर और डीएम का एक्शन! कचहरी से तहसील तक सुधार का 'ब्लूप्रिंट' तैयार

वाराणसी: न्याय के मंदिर और प्रशासन के बीच की खाई को पाटने के लिए शनिवार को वाराणसी कलेक्ट्रेट में एक बड़ी 'मैराथन' बैठक हुई। जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार की अध्यक्षता में प्रशासन और बार के दिग्गजों के बीच सीधी बात हुई। मुद्दा साफ था—जनता को तारीख पर तारीख न मिले और राजस्व के काम में बाबूगिरी न चले!

​इस हाई-प्रोफाइल बैठक में सेन्ट्रल बार, बनारस बार और राजस्व बार के पदाधिकारियों ने प्रशासन के सामने समस्याओं का पुलिंदा खोलकर रख दिया।

वकीलों की दो टूक: "तहसील में कब बैठेंगे लेखपाल, साहब जवाब दो?"

​बैठक में अधिवक्ताओं ने उन नसों पर हाथ रखा, जहाँ दर्द सबसे ज्यादा है:

  • लेखपालों की मनमानी: मांग की गई कि तहसील में लेखपालों की उपस्थिति का दिन और समय फिक्स हो। बकायदा रजिस्टर बने ताकि पता चले कि साहब फील्ड में हैं या आराम फरमा रहे हैं।
  • चकबंदी का पेंच: चकबंदी के दौरान हुई पुरानी गलतियों और हस्तलिखित खतौनी के डिजिटलीकरण की सुस्त रफ्तार पर वकीलों ने कड़ा ऐतराज जताया।
  • सुरक्षा और स्वास्थ्य: कचहरी की बाउंड्रीवाल पर कंटीले तार लगाने और परिसर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की 'बीमार' हालत को सुधारने की मांग उठी। वकीलों ने साफ कहा—आपात स्थिति में एम्बुलेंस न मिलना शर्मनाक है!

डीएम का सख्त निर्देश: फाइलों में नहीं, जमीन पर दिखना चाहिए काम

​वकीलों की दलीलों को सुनने के बाद जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने अधिकारियों की क्लास लगाई। उन्होंने साफ निर्देश दिए:

  1. बैनामा और म्यूटेशन (दाखिल-खारिज): इसके लिए एक समय-सीमा तय हो, ताकि आम जनता को बाबुओं के चक्कर न काटने पड़ें।
  2. पेंडिंग फाइलें: लंबित पत्रावलियों का निस्तारण 'फास्ट ट्रैक' मोड पर किया जाए।
  3. सुरक्षा और सुविधाएं: परिसर की सुरक्षा और एम्बुलेंस की उपलब्धता पर डीएम ने तत्काल प्रभावी कार्रवाई का आश्वासन दिया।
  4. बेबाक टिप्पणी: प्रशासन और बार (अधिवक्ता) एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। अगर इनके बीच तालमेल बिगड़ता है, तो पिसती सिर्फ 'जनता' है। डीएम साहब के निर्देश तो कड़क हैं, लेकिन देखना ये होगा कि क्या तहसील के बाबू और लेखपाल इस 'सुधार' को हकीकत में बदलने देंगे या व्यवस्था फिर से 'पुरानी चाल' पर लौट आएगी?



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