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महादेव के दरबार में बड़े फैसले! गौवंश की सेवा से लेकर संस्कृत के संरक्षण तक, मंडलायुक्त ने लगाई मुहर

by on | 2026-02-21 23:04:53

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महादेव के दरबार में बड़े फैसले! गौवंश की सेवा से लेकर संस्कृत के संरक्षण तक, मंडलायुक्त ने लगाई मुहर


​वाराणसी: धर्म की नगरी काशी में विकास और व्यवस्थाओं को लेकर एक बार फिर 'धमाकेदार' बैठक संपन्न हुई।  मंडलायुक्त सभागार में काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद (109वीं) और विशिष्ट क्षेत्र विकास परिषद (15वीं) की संयुक्त बैठक ने स्पष्ट कर दिया कि धाम की भव्यता के साथ-साथ अब उसकी व्यवस्थाओं को 'हाई-टेक' और 'सेवा-उन्मुख' बनाया जाएगा।
​मंडलायुक्त एस राजलिंगम की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में पुलिस, प्रशासन और विकास प्राधिकरण के दिग्गजों की मौजूदगी में काशी के कायाकल्प का नया रोडमैप तैयार किया गया है।
​न्यास परिषद के बड़े ऐलान: अर्चकों का सम्मान और गौ-सेवा सर्वोपरि
​मंदिर न्यास ने इस बार केवल निर्माण ही नहीं, बल्कि आस्था और संस्कृति से जुड़े अहम फैसलों पर मुहर लगाई है:
​अर्चकों की बल्ले-बल्ले: मंदिर में कार्यरत अर्चकों की सेवा शर्तों के अनुबंध प्रस्ताव पर सहमति बन गई है।
​अन्नपूर्णा मंदिर का होगा कायाकल्प: परिसर स्थित मां अन्नपूर्णा मंदिर के सौंदर्यीकरण को हरी झंडी दे दी गई है।
​सारनाथ में गौ-सेवा का संकल्प: बेनीपुर (सारनाथ) स्थित संकट हरण हनुमान मंदिर की गौशाला का पूरा खर्च अब बाबा विश्वनाथ का न्यास उठाएगा। हर प्रदोष पर गौवंश का हेल्थ चेकअप भी अनिवार्य होगा।
​संस्कृत और शिक्षा को संबल: संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए बैठने (उपवेशन) की व्यवस्था हेतु फंड जारी कर दिया गया है। साथ ही प्रयागराज और चंदौली के प्राचीन मंदिरों के जीर्णोद्धार का जिम्मा भी न्यास ने लिया है।
​विकास परिषद का 'स्मार्ट' एक्शन: अब 3D में दिखेगी काशी की विरासत
​विशिष्ट क्षेत्र विकास परिषद ने श्रद्धालुओं की सुविधा और तकनीक के तालमेल पर फोकस किया है:
​3D इमर्सिव म्यूजियम: सिटी म्यूजियम और वाराणसी गैलरी में अब भक्त 3D तकनीक के जरिए काशी के इतिहास को जीवंत होते देख सकेंगे। इसके लिए कंसल्टेंट चयन को मंजूरी मिल गई है।
​देसी अंदाज़ में बदलाव: धाम परिसर के 50 प्रतिशत शौचालयों को अब भारतीय शैली (Indian Style) में बदला जाएगा, ताकि आम श्रद्धालुओं को सुविधा हो।
​धूप से राहत: भक्तों को गर्मी से बचाने के लिए टेंसाइल शेडिंग (छायादार शेड) के काम को भी फाइनल कर दिया गया है।
​दुकानदारों को राहत: परिसर की दुकानों की विद्युत दरों को फिक्स करने का निर्णय लिया गया है, जिससे व्यापारियों में खुशी है।
​बेबाक टिप्पणी: काशी विश्वनाथ धाम अब सिर्फ दर्शन का केंद्र नहीं, बल्कि सांस्कृतिक क्रांति का गवाह बन रहा है। गौवंश की चिंता और संस्कृत के छात्रों की सुविधा पर ध्यान देना यह बताता है कि विकास सिर्फ पत्थरों में नहीं, बल्कि परंपराओं में भी झलकना चाहिए।



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