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गंगा में मनमानी की तो खैर नहीं: वाराणसी पुलिस का 'एक्शन' प्लान तैयार, अब सीधे होगी जेल!

by on | 2026-02-18 23:08:17

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गंगा में मनमानी की तो खैर नहीं: वाराणसी पुलिस का 'एक्शन' प्लान तैयार, अब सीधे होगी जेल!

वाराणसी। मोक्षदायिनी गंगा की लहरों पर अब नाविकों की मनमानी और लापरवाही भारी पड़ने वाली है। अगर आप वाराणसी में नाव चलाने वाले हैं या फिर पर्यटक बनकर गंगा की सैर करने जा रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए सबसे जरूरी है। जल पुलिस कमिश्नरेट वाराणसी ने सुरक्षा को ताक पर रखने वाले नाव चालकों के खिलाफ 'युद्धस्तर' पर बिगुल फूंक दिया है।

BNS की धारा 282: लापरवाही की तो नपेगा मालिक और नाविक

​प्रशासन ने साफ कर दिया है कि गंगा में अब 'जुगाड़' और 'लापरवाही' का खेल नहीं चलेगा। नए कानून यानी भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 282 के तहत अब पुलिस ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।

क्या है धारा 282 का फंदा? > अगर किसी नाविक ने जल्दबाजी दिखाई या लापरवाही से जलयान चलाया, जिससे किसी की जान को खतरा हुआ, तो:

  • 6 महीने की जेल की हवा खानी पड़ेगी।
  • 10,000 रुपये का जुर्माना जेब ढीली कर देगा।
  • ​या फिर जेल और जुर्माना, दोनों का 'डबल डोज' मिलेगा।


ये 11 नियम नहीं माने, तो समझो शामत आई!

​जल पुलिस ने सख्त गाइडलाइंस जारी की हैं, जिनका उल्लंघन सीधे कार्रवाई को दावत देना है:

  1. ओवरलोडिंग पर पाबंदी: क्षमता से एक भी सवारी ज्यादा हुई, तो नाव जब्त समझो।
  2. लाइफ जैकेट अनिवार्य: बिना जैकेट के सफर मौत को दावत देने जैसा है, जो अब बर्दाश्त नहीं होगा।
  3. 'ट्रैफिक' नियमों का पालन: अस्सी से नमो घाट जाते समय 'रेता साइड' और वापसी में 'घाट साइड' ही चलना होगा।
  4. धुआं छोड़ने वाली नावें बंद: गंगा में प्रदूषण फैलाने वाले खटारा इंजन अब नहीं चलेंगे।
  5. सेल्फी का 'खतरनाक' शौक खत्म: चलती नाव पर यात्रियों को खड़ा कर फोटो खिंचवाना अब अपराध है।
  6. किराये में 'लूट' बंद: निर्धारित रेट से एक पैसा भी ज्यादा लिया, तो खैर नहीं।
  7. शराब पीकर नाव चलाना बैन: नशे की हालत में चप्पू पकड़ा, तो सीधे हवालात की सैर होगी।
  8. रजिस्ट्रेशन जरूरी: बिना कागज के गंगा की लहरों पर उतरने का सपना छोड़ दें।

बेबाक टिप्पणी

​वाराणसी प्रशासन का यह कदम सराहनीय है, क्योंकि अक्सर पर्यटकों की सुरक्षा को नाविकों के लालच की भेंट चढ़ते देखा गया है। अब देखना यह है कि क्या यह आदेश सिर्फ कागजों तक सीमित रहता है या फिर जमीन (और जल) पर भी इसका खौफ दिखता है। नाविकों को अब समझना होगा कि गंगा सेवा का नाम है, लापरवाही का नहीं।



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