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गोमती जोन में 'जीरो टॉलरेंस': DCP आकाश पटेल का सख्त संदेश— "अपराधी या तो जेल में होंगे या निगरानी में!"

by on | 2026-02-17 22:12:54

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गोमती जोन में 'जीरो टॉलरेंस': DCP आकाश पटेल का सख्त संदेश— "अपराधी या तो जेल में होंगे या निगरानी में!"

लखनऊ |  राजधानी के गोमती जोन में कानून-व्यवस्था को और अधिक अभेद्य बनाने के लिए पुलिस उपायुक्त (DCP) आकाश पटेल एक्शन मोड में हैं। जोन कार्यालय में आयोजित समीक्षा गोष्ठी के दौरान उन्होंने थाना प्रभारियों की क्लास ली और साफ कर दिया कि अपराध नियंत्रण में ढिलाई अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

लंबित फाइलों पर बरसे DCP: "तारीख नहीं, अब निस्तारण चाहिए"

​बैठक में सबसे ज्यादा गाज गिरी उन विवेचनाओं पर जो लंबे समय से धूल फांक रही हैं। DCP ने लंबित विवेचनाओं की धीमी प्रगति पर गहरा असंतोष जताया।

  • डेडलाइन तय: विवेचकों के साथ नियमित बैठक कर गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के आदेश।
  • टेक्निकल ट्रैकिंग: लूट और चोरी की घटनाओं में वांछित अपराधियों को अब 'ट्रेडिशनल' के साथ-साथ 'डिजिटल' जाल बिछाकर पकड़ने पर जोर।
  • माफियाओं पर प्रहार: चिन्हित माफियाओं और उनके कुनबे की काली कमाई से बनी संपत्तियों का सत्यापन कर कुर्की/जब्ती की कार्रवाई तेज करने के निर्देश।

अपराधियों की कुंडली खंगालने का निर्देश

​DCP आकाश पटेल ने साफ कहा कि क्षेत्र के हिस्ट्रीशीटरों को अब चैन से बैठने नहीं दिया जाएगा।

  1. लोकेशन और ऑक्यूपेशन: हिस्ट्रीशीटर अभी कहाँ रह रहे हैं और कमाई का जरिया क्या है? इसका भौतिक सत्यापन अनिवार्य।
  2. कठोर अधिनियम: गैंगेस्टर, गुंडा एक्ट और NDPS के तहत पंजीकृत अपराधियों के खिलाफ विशेष अभियान।
  3. गौ-तस्करी पर लगाम: संवेदनशील क्षेत्रों में इंटेलिजेंस नेटवर्क को मजबूत कर कड़ी निरोधात्मक कार्रवाई के निर्देश।

त्यौहारों पर अलर्ट: पीस कमेटी से बनेगी बात

​आगामी त्यौहारों को देखते हुए पुलिस को 'पब्लिक फ्रेंडली' रहने के साथ-साथ 'सतर्क' रहने को कहा गया है।

​"कानून-व्यवस्था से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होगा। प्रत्येक थाना प्रभारी अपने क्षेत्र की एक-एक गतिविधि के प्रति जवाबदेह हैं। संवेदनशील स्थलों पर भ्रमण बढ़ाएं और शांति समितियों के साथ संवाद कायम रखें।"

आकाश पटेल, DCP गोमती जोन


जनता की सुनवाई सबसे पहले

​IGRS (जन सुनवाई) के प्रार्थना पत्रों के निस्तारण में खानापूर्ति करने वाले अधिकारियों को चेतावनी दी गई है। अब निस्तारण का भौतिक सत्यापन होगा, ताकि पीड़ित को न्याय मिलना केवल कागजों तक सीमित न रहे।



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