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प्रयाग से लौटे 'कुंभेश्वर महादेव': अब काशी में ही मिलेगा कुंभ स्नान का फल!

by on | 2026-02-17 21:53:31

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प्रयाग से लौटे 'कुंभेश्वर महादेव': अब काशी में ही मिलेगा कुंभ स्नान का फल!


वाराणसी | सनातन आस्था के दो सबसे बड़े केंद्रों—काशी और प्रयाग—का मिलन आज एक बार फिर जीवंत हो उठा। माघ मेले की पावन पूर्णाहुति के बाद, भगवान श्री कुंभेश्वर महादेव त्रिवेणी के तट से विदा लेकर पुनः बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी पधार चुके हैं।

45 दिनों तक कल्पवासियों को दर्शन देने के बाद, आज सवेरे जब महादेव का विग्रह काशी विश्वनाथ धाम पहुँचा, तो पूरा परिसर 'हर-हर महादेव' के जयघोष से गूंज उठा।

परंपरा: जब महादेव खुद जाते हैं 'कुंभ स्नान' करने

अध्यात्म की यह अनूठी परंपरा सदियों पुरानी है। माना जाता है कि श्री काशी विश्वनाथ जी के 'कुंभ स्नान स्वरूप' ही कुंभेश्वर महादेव हैं।

 * प्रस्थान: 01 जनवरी 2026 को विधि-विधान के साथ इन्हें प्रयागराज भेजा गया था।

 * प्रवास: माघ मेले के दौरान न्यास शिविर में बने विशेष मंदिर में महादेव विराजमान रहे।

 * वापसी: आज त्रिवेणी संगम के जल से अभिषेक के बाद उन्हें ससम्मान वापस लाया गया।

 "जो पुण्य फल कुंभ की अवधि में त्रिवेणी स्नान से मिलता है, वही फल श्रद्धापूर्वक 'कुंभेश्वर महादेव' के दर्शन मात्र से सुलभ हो जाता है। यह काशी-प्रयाग के अटूट रिश्ते का प्रतीक है।"

> — आचार्य पं० ओमप्रकाश, अर्चक विद्वान


भव्य स्वागत और शास्त्रोक्त पूजन

काशी धाम पहुँचते ही मंदिर न्यास के अधिकारियों और वेदपाठी विद्वानों ने पुष्प वर्षा कर महादेव की अगवानी की। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विशेष आरती संपन्न हुई और उन्हें उनके नियत स्थान पर प्रतिष्ठित किया गया।

श्रद्धालु यहाँ कर सकेंगे दर्शन

मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्री विश्व भूषण ने बताया कि आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ है। अब अगले माघ मास तक श्रद्धालु भगवान कुंभेश्वर महादेव के दर्शन यहाँ कर सकेंगे:

|स्थान * श्री काशी विश्वनाथ मंदिर प्रांगण 

नियत दिशा : उत्तर-पश्चिम (वायव्य कोण) 

विराजमान स्थल : श्री विघ्न विनाशक गणपति मंदिर 

बड़ी बात: यदि आप इस वर्ष माघ मेले में प्रयाग जाकर डुबकी नहीं लगा पाए हैं, तो निराश होने की ज़रूरत नहीं है। बाबा विश्वनाथ के आंगन में कुंभेश्वर महादेव के दर्शन कीजिए, फल वही मिलेगा!





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