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कॉलेज वाली 'दोस्ती', बैंक वाली 'उधारी' और फिर... मौत की आखिरी सवारी! सगे भाई-बहन ने मिलकर गंगा किनारे मिटाया क्लर्क का वजूद

by on | 2026-02-14 21:42:47

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कॉलेज वाली 'दोस्ती', बैंक वाली 'उधारी' और फिर... मौत की आखिरी सवारी! सगे भाई-बहन ने मिलकर गंगा किनारे मिटाया क्लर्क का वजूद

गाजीपुर। इश्क, पैसा और बदनामी का डर जब सिर चढ़कर बोलता है, तो अंजाम रूह कंपा देने वाला होता है। कोतवाली के बारहबंगला निवासी और पीजी कॉलेज के क्लर्क मनोहर सिंह यादव (34) की बेरहमी से गला दबाकर हत्या कर दी गई। चौंकाने वाला खुलासा ये है कि इस खूनी खेल को किसी पेशेवर अपराधी ने नहीं, बल्कि मनोहर की अपनी सहपाठी दीपा सिंह और उसके सगे भाई परीक्षित ने मिलकर अंजाम दिया।

​शनिवार को एसपी सिटी डॉ. राकेश मिश्रा ने पुलिस दफ्तर में जब इस हत्याकांड की फाइल खोली, तो हर कोई दंग रह गया।

9 फरवरी की वो 'काली शाम': साजिश का जाल

​9 फरवरी की शाम मनोहर अपनी बाइक से निकले तो थे घर लौटने के लिए, लेकिन कातिलों ने उनकी मंजिल श्मशान तय कर रखी थी। पुलिस को जांच के दौरान वीर हमीद सेतु पर मनोहर की लावारिस बाइक मिली और शुक्रवार को बवाड़े के पास गंगा की लहरों ने उनकी लाश उगल दी। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट ने साफ कर दिया— ये हादसा नहीं, सोची-समझी हत्या थी।

गिरफ्तार हत्यारे:

  • दीपा सिंह (30): मऊ SBI में नौकरी करने वाली सहेली।
  • परीक्षित सिंह: दीपा का सगा भाई (निवासी: मेदनीपुर, सुहवल)।

क्यों बनी 'सहेली' ही 'जल्लाद'? उधारी या कुछ और?

​पूछताछ में जो कहानी सामने आई, वो किसी फिल्म की पटकथा जैसी है। हत्या की वजह सिर्फ पैसा नहीं, बल्कि 'इश्क में दगा' और 'बदनामी का डर' भी था:

  • 2.5 लाख का कांटा: दीपा ने मनोहर को साल भर पहले ढाई लाख रुपये उधार दिए थे, जिसे मनोहर लौटाने का नाम नहीं ले रहा था।
  • ब्लैकमेलिंग और दूसरी लड़की: आरोपी भाई के मुताबिक, मनोहर उसकी बहन को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा था। साथ ही, वो किसी दूसरी लड़की के संपर्क में भी था और दीपा को बदनाम करने की धमकी दे रहा था।
  • मौत का बुलावा: 9 फरवरी को दीपा ने भाई को फोन किया कि मनोहर उसे घर छोड़ने आ रहा है। भाई ने फौरन उसे गंगा नदी रेलवे पुल के नीचे बुलाया।
  • ​"पुल के नीचे जब पैसे मांगे गए, तो मनोहर अकड़ गया। उसने साफ कह दिया— पैसा नहीं दूंगा। बस फिर क्या था, भाई-बहन ने मिलकर उसका गला घोंट दिया और लाश को गंगा की गहराई में फेंक दिया।" — पुलिस रिपोर्ट


    कातिलों की 'स्मार्ट' चाल... पर पुलिस निकली चार कदम आगे!

    ​हत्या के बाद सबूत मिटाने के लिए भाई-बहन ने शातिराना दिमाग लगाया:

    1. मिट्टी का खेल: बाइक की नंबर प्लेट पर मिट्टी पोत दी ताकि कोई देख न ले।
    2. सुसाइड का ड्रामा: बाइक को पुल पर खड़ा किया और मनोहर का मोबाइल, चाभी व हेलमेट नदी में फेंक दिया ताकि दुनिया को लगे कि मनोहर ने खुदकुशी की है।



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