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सगी बेटी से दुष्कर्म करने वाले कलयुगी पिता को 'प्राकृतिक मृत्यु' तक उम्रकैद

by on | 2026-02-12 21:11:04

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सगी बेटी से दुष्कर्म करने वाले कलयुगी पिता को 'प्राकृतिक मृत्यु' तक उम्रकैद

सोनभद्र। रिश्तों को कलंकित करने वाले एक जघन्य मामले में सोनभद्र की विशेष अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश (विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट) अमित वीर सिंह की अदालत ने अपनी ही 15 वर्षीय नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म करने वाले पिता को कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि दोषी पिता को अपने शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक जेल की सलाखों के पीछे रहना होगा।

त्वरित न्याय: मात्र 36 दिनों में फैसला

न्यायालय ने इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए महज 36 दिनों के भीतर सुनवाई पूरी कर फैसला सुनाया। अभियोजन पक्ष ने 9 गवाहों के बयान और ठोस दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए। डीएनए (DNA) रिपोर्ट ने भी इस बात की पुष्टि की कि पीड़िता के नवजात बच्चे का पिता उसका सगा पिता ही है।

जुर्माना और पीड़िता को मुआवजा

अदालत ने दोषी पर 1.5 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है:

 * अर्थदंड न भरने पर दोषी को 6 माह की अतिरिक्त कैद काटनी होगी।

 * जुर्माने की राशि में से 1 लाख 20 हजार रुपये पीड़िता को सहायता के तौर पर दिए जाएंगे।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला चोपन थाना क्षेत्र का है। घटना का खुलासा तब हुआ जब पीड़िता के मामा ने 27 अक्टूबर 2025 को तहरीर दी। रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल 2025 में सगे पिता ने अपनी ही बेटी के साथ शारीरिक संबंध बनाए, जिससे किशोरी गर्भवती हो गई।

पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार्जशीट दाखिल की और 7 जनवरी 2026 को न्यायालय द्वारा आरोप तय किए गए। सरकारी वकील दिनेश प्रसाद अग्रहरि, सत्यप्रकाश त्रिपाठी और नीरज कुमार सिंह ने पीड़िता का पक्ष मजबूती से रखा।

 "न्यायालय का यह कड़ा फैसला समाज में एक कड़ा संदेश है कि इस तरह के राक्षसी कृत्य करने वालों के लिए कानून में कोई जगह नहीं है।" — अभियोजन पक्ष

[बॉक्स न्यूज़]: पीड़िता ने दिया बेटी को जन्म

मामले में एक भावुक मोड़ तब आया जब पीड़िता के 7 माह के गर्भ को लोकलाज के कारण गिराने (गर्भपात) की अनुमति मांगी गई थी, लेकिन कानूनी और चिकित्सीय कारणों से कोर्ट से अनुमति नहीं मिली। इसके बाद सीडब्ल्यूसी (CWC) की देखरेख में 13 जनवरी 2026 को जिला अस्पताल में पीड़िता ने एक बच्ची को जन्म दिया। डीएनए जांच में अभियुक्त के दोष की पुष्टि होने के बाद अदालत ने न्याय की मिसाल पेश की।




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