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IAS अभिषेक प्रकाश: 'क्लीन चिट' का सोलर धमाका, क्या अब होगी कुर्सी पर वापसी?

by on | 2026-02-11 11:12:35

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IAS अभिषेक प्रकाश: 'क्लीन चिट' का सोलर धमाका, क्या अब होगी कुर्सी पर वापसी?

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की नौकरशाही से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। सोलर प्रोजेक्ट में कथित भ्रष्टाचार के जिस भंवर में IAS अभिषेक प्रकाश फंसे थे, इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने उन्हें उससे पूरी तरह बाहर निकाल लिया है। अदालत ने न केवल एफआईआर रद्द की है, बल्कि चार्जशीट और तलबी आदेश को भी कूड़ेदान का रास्ता दिखा दिया है।

केस की हवा क्यों निकली?

कहते हैं 'पहाड़ खोदा और निकली चुहिया', यहाँ तो चुहिया भी नहीं मिली। कोर्ट में सुनवाई के दौरान जो बातें सामने आईं, उसने जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं:

 * गलतफहमी का खेल: सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि शिकायतकर्ता ने खुद माना कि यह पूरा मामला "गलतफहमी" का नतीजा था।

 * सबूतों का अकाल: एसटीएफ (STF) ने जांच तो की, लेकिन कोर्ट में न तो कोई पुख्ता दस्तावेजी सबूत पेश किए जा सके और न ही कोई इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य टिक पाया।

 * कानूनी आधार गायब: अदालत ने साफ कहा कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) के तहत कोई अपराध बनता ही नहीं है।

तारीखों के आईने में मामला


20 मार्च 2025 : एफआईआर दर्ज हुई, हड़कंप मचा। 

 15 मई 2025 : आनन-फानन में चार्जशीट दाखिल हुई। 

17 मई 2025 : तलबी आदेश जारी हुआ। 

 आज (फरवरी 2026) :  हाईकोर्ट ने पूरी कार्यवाही को ही 'निरस्त' कर दिया। 

 विश्लेषण: अब आगे क्या?

अभिषेक प्रकाश के साथ-साथ निकांत जैन को भी इस मामले में राहत मिली है। लेकिन असली सवाल अब 'बहाली' का है। प्रशासनिक गलियारों में कानाफूसी शुरू हो गई है कि क्या उन्हें जल्द ही कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलेगी?

> बेबाक बात: जब शिकायतकर्ता खुद कह रहा है कि मामला "गलतफहमी" था, तो सवाल उठता है कि एक आईएएस अधिकारी को महीनों तक निलंबन की आग में क्यों झोंका गया? क्या यह सिस्टम की जल्दबाजी थी या किसी बड़े खेल का हिस्सा?

अब गेंद योगी सरकार के पाले में है। विधिक राय (Legal Opinion) के बाद जल्द ही उनकी बहाली पर मुहर लग सकती है।




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