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दिखावे की 'चमक' या आम आदमी को 'झटका'? 53 लाख करोड़ के बजट में क्या मिला और क्या रह गया अधूरा!

by on | 2026-02-01 15:34:42

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दिखावे की 'चमक' या आम आदमी को 'झटका'? 53 लाख करोड़ के बजट में क्या मिला और क्या रह गया अधूरा!


नई दिल्ली | वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 53 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट तो पेश कर दिया, लेकिन क्या इस चमक-धमक में आम आदमी की उम्मीदें कहीं खो गई हैं? 'खबर बेबाक 24' की पड़ताल में सामने आया है कि जहां सरकार बड़े-बड़े रेल कॉरिडोर और विदेशी पढ़ाई सस्ती करने का ढिंढोरा पीट रही है, वहीं मध्यम वर्ग और किसानों के हाथ इस बार भी खाली रह गए हैं।
टैक्सपेयर्स: राहत की उम्मीद पर फिरा पानी!
​मिडिल क्लास सोच रहा था कि इस बार टैक्स छूट की सीमा 12 लाख से बढ़कर 14 लाख होगी, लेकिन सरकार ने 'जैसे को तैसा' वाला रुख अपनाया।
​कोई बदलाव नहीं: नई टैक्स रिजीम में स्लैब जस के तस हैं।
​निवेश पर 'ताला': PPF, NPS और ELSS पर नई रिजीम में कोई छूट नहीं मिली। यानी बचत करो, लेकिन टैक्स फिर भी भरो!
​बेबाक टिप्पणी: पुराने टैक्स सिस्टम के फायदों को नए सिस्टम में न देना साफ बताता है कि सरकार आपको 'बचत' से ज्यादा 'खर्च' की ओर धकेल रही है।
किसान: 6000 के 'जाल' में उलझी उम्मीदें
​अन्नदाता को भरोसा था कि 'पीएम किसान निधि' की राशि 6000 से बढ़कर 12000 होगी, पर बजट ने उनके अरमानों पर ठंडा पानी डाल दिया।
​MSP पर चुप्पी: फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को लेकर कोई ठोस कानूनी गारंटी या बड़ा ऐलान गायब रहा।
​खेती की लागत: किसानों को डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के सपने दिखाए गए हैं, लेकिन जेब में आने वाली नकदी पर सरकार मौन है।
​ सीनियर सिटीजन और निवेशक: सरकार ने दिखाई 'लाल झंडी'
​बुजुर्गों और शेयर बाजार के खिलाड़ियों के लिए यह बजट किसी 'शॉक' से कम नहीं है:
​रेलवे रियायत: उम्मीद थी कि बुजुर्गों को ट्रेन टिकट में मिलने वाली छूट बहाल होगी, लेकिन सरकार ने सिर्फ 'कॉरिडोर' की पटरी बिछाई, बुजुर्गों का सफर सस्ता नहीं किया।
​शेयर बाजार को झटका: F&O (फ्यूचर एंड ऑप्शन) ट्रेडर्स पर ट्रांजैक्शन चार्ज बढ़ाकर सरकार ने निवेशकों की कमाई में सेंध लगा दी है। LTCG और STCG में कटौती न होना जख्मों पर नमक जैसा है।
राहत वाली खबर: दवाएं हुईं सस्ती!
​बजट में एक अच्छी बात यह रही कि गंभीर बीमारियों की दवाओं पर कस्टम ड्यूटी घटाई गई है। कैंसर और अन्य दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए अब आम आदमी को घर-बार नहीं बेचना पड़ेगा। साथ ही, विदेश में पढ़ाई और इलाज को सस्ता करने का ऐलान एक सकारात्मक कदम है।
​सावधान: जेब खाली करने की तैयारी!
​1 फरवरी से आपकी आदतों पर महंगाई का प्रहार होने वाला है। पान-मसाला और सिगरेट के शौकीनों को बड़ा शॉक लगेगा क्योंकि इनके दाम बढ़ने तय हैं।
​बेबाक निष्कर्ष
​बजट 2026 'ऊपर से फिट, अंदर से थोड़ा अनफिट' नजर आता है। 53 लाख करोड़ का साइज तो बड़ा है, लेकिन जब तक किसान की आय और मिडिल क्लास की टैक्स बचत नहीं बढ़ती, तब तक 'विकसित भारत' का नारा आम आदमी के लिए केवल एक सपना ही रहेगा।



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