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सिगरा सेक्स रैकेट विवाद और शालिनी यादव का पलटवार

by admin@bebak24.com on | 2025-12-05 01:32:55

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सिगरा सेक्स रैकेट विवाद और शालिनी यादव का पलटवार

वाराणसी : ​हाल ही में, शालिनी यादव सिगरा थाना क्षेत्र में एक स्पा सेंटर से जुड़े सेक्स रैकेट के मामले में सुर्खियों में आई हैं, जिस पर उन्होंने और उनके पति ने कड़ी आपत्ति जताई है।
​विवाद का केंद्र:
​सिगरा थाना क्षेत्र में एक 'मेलोडी स्पा सेंटर' में पुलिस ने छापा मारकर सेक्स रैकेट का भंडाफोड़ किया और 9 महिलाओं समेत कुल 13 लोगों को गिरफ्तार किया।
​यह स्पा सेंटर जिस जगह चल रहा था, वह फ्लैट कथित तौर पर शालिनी यादव के पति अरुण यादव के नाम पर है।
​शालिनी यादव का पक्ष और कानूनी चेतावनी:
​शालिनी यादव ने इस मामले में अपने नाम को जोड़े जाने पर कड़ा ऐतराज जताया है और मीडिया व सोशल मीडिया यूजर्स को मानहानि का मुकदमा करने की चेतावनी दी है।
​उन्होंने और उनके पति अरुण यादव ने स्पष्ट किया है कि फ्लैट को किराए पर दिया गया था, और उन्हें किराएदार द्वारा चलाए जा रहे अवैध धंधे के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।
​अरुण यादव ने कहा है कि उनका उक्त स्पा सेंटर से कोई संबंध नहीं है, और बदनाम करने की कोशिश की गई है।
​राजनीतिक प्रतिक्रिया:
​इस मामले को लेकर कांग्रेस नेत्री सुप्रिया श्रीनेत ने सोशल मीडिया पर शालिनी यादव का नाम घसीटा, जिस पर यूपी भाजपा ने जवाब दिया कि स्पा सेंटर किराएदार चला रहा था।

शालिनी यादव का राजनीतिक सफर: कांग्रेस से सपा और फिर भाजपा तक

भाजपा नेता शालिनी यादव का राजनीतिक सफर उत्तर प्रदेश, खासकर वाराणसी में काफी चर्चा में रहा है, क्योंकि उन्होंने कई प्रमुख दलों के साथ काम किया है।
* राजनीतिक विरासत और शिक्षा:
   * शालिनी यादव दिवंगत पूर्व कांग्रेसी सांसद और केंद्रीय मंत्री श्यामलाल यादव की पुत्रवधू हैं, जिससे उन्हें राजनीतिक पृष्ठभूमि विरासत में मिली।
   * उन्होंने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से अंग्रेजी में ग्रेजुएशन किया है और फैशन डिजाइनिंग में भी डिप्लोमा किया है।
* मेयर का चुनाव (कांग्रेस):
   * उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस पार्टी के साथ की।
   * साल 2017 में, उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर वाराणसी मेयर का चुनाव लड़ा। हालांकि वह भाजपा की मृदुला जायसवाल से हार गईं, लेकिन उन्होंने 1.14 लाख से अधिक वोट हासिल करके अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
* सपा में प्रवेश (2019):
   * 2019 लोकसभा चुनाव से ठीक पहले, उन्होंने कांग्रेस छोड़कर समाजवादी पार्टी (सपा) का दामन थाम लिया।
   * उन्हें सपा-बसपा गठबंधन द्वारा वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ मैदान में उतारा गया, जिससे उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। वह इस चुनाव में दूसरे स्थान पर रही थीं।
* भाजपा में शामिल (जुलाई 2023):
   * 2019 चुनाव के बाद उन्होंने अपनी राजनीतिक दिशा बदली और जुलाई 2023 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गईं।
   * भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की मौजूदगी में उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई गई, जिसे लोकसभा 2024 से पहले सपा के लिए एक बड़ा झटका माना गया था।



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