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सोनभद्र में 'लाल बालू' की डकैती! खाकी की 'स्कॉर्पियो' और सफेदपोशों के गठजोड़ ने लोकतंत्र को किया घायल

by on | 2026-04-13 20:42:26

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सोनभद्र में 'लाल बालू' की डकैती! खाकी की 'स्कॉर्पियो' और सफेदपोशों के गठजोड़ ने लोकतंत्र को किया घायल

संतोष राय

सोनभद्र। कहने को तो सूबे में 'बाबा का हंटर' गरज रहा है, लेकिन सोनभद्र की वादियों में कानून की धज्जियां पोकलैंड मशीनों के शोर में दफन हो चुकी हैं। यहाँ 'जीरो टॉलरेंस' का नारा बालू के टीलों के नीचे दबा नजर आता है। ओबरा के रूद्रा माइनिंग की आड़ में शुरू हुआ यह खूनी खेल साबित कर रहा है कि जब रक्षक ही भक्षक के 'रिमोट कंट्रोल' से चलने लगें, तो आम आदमी की बिसात ही क्या?

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​अवैध खनन के काले कारोबार का कच्चा चिट्ठा खोलने निकले पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष अनिल यादव को अंदाजा नहीं था कि माफिया का रसूख संविधान से ऊपर हो चुका है। आरोप है कि एमएलसी विनीत सिंह के खास धीरज सिंह और उसके सशस्त्र लठैतों ने सरेराह नंगा नाच किया। अनिल यादव के साथ बदसलूकी तो हुई ही, उनके भाई राजेंद्र यादव को जानवरों की तरह पीटकर अगवा कर लिया गया। हालांकि, पुलिस के भारी हस्तक्षेप के बाद घंटों बाद दबंगों ने उन्हें छोड़ा, लेकिन खौफ का मंजर अब भी बरकरार है।

बता दें कि यहां जाने से मीडिया भी कतराती है।

हैरानी देखिए: चोपन पुलिस की आंखों पर ऐसी पट्टी बंधी है कि उसे 'अपहरण' जैसा संगीन जुर्म सिर्फ 'मामूली विवाद' नजर आ रहा है। पीड़ित परिवार इंसाफ के लिए दर-दर भटक रहा है, लेकिन खाकी की सुस्ती बता रही है कि 'साहब' का रिमोट कंट्रोल कहीं और से ऑपरेट हो रहा है।

बेबाक विश्लेषण: काले धंधे की 'काली खाकी' और करोड़ों का साम्राज्य

​सोनभद्र में खनन माफिया का तंत्र किसी समानांतर हुकूमत से कम नहीं है। बेबाक 24 की पड़ताल में जो सच सामने आया है, वो रूह कंपा देने वाला है:

  • माफिया की स्कॉर्पियो, पुलिस की सवारी: चर्चा है कि इलाके के थानेदारों की 'शाही' सुख-सुविधा का जिम्मा खनन माफिया ने उठा रखा है। 'प्राइवेट ड्राइवर' और लग्जरी स्कॉर्पियो खाकी को वही लोकेशन दिखाती हैं, जहाँ माफिया की मर्जी होती है। क्या ये वर्दी का अपमान नहीं है?
  • अघोषित कुबेर बने थानेदार: स्थानीय सूत्रों का दावा है कि अगर पिछले 10 वर्षों में यहाँ तैनात रहे थानेदारों की संपत्ति की निष्पक्ष जांच हो जाए, तो नामी-बेनामी करोड़ों का साम्राज्य निकलकर सामने आएगा। साहबों की अकूत दौलत का हिसाब तो शायद ही किसी के पास हो!
  • मौतों पर खामोशी: सीएम की मौजूदगी में खदान धंसी, 7 जानें गईं, लेकिन जांच का क्या हुआ? फाइलें दफ्तरों में धूल फांक रही हैं और मुख्य आरोपी 'स्टे ऑर्डर' की ढाल लेकर खुलेआम घूम रहे हैं। क्या गरीबों की जान इतनी सस्ती है?
  • सत्ता-विपक्ष का 'मधु मिलन': जब बात खनन की मलाई की आती है, तो सियासी सरहदें खत्म हो जाती हैं। अखिलेश यादव की चुप्पी और सत्ता पक्ष का मौन समर्थन इस बात का गवाह है कि इस 'हमाम' में सब नंगे हैं।

सत्ता के इक़बाल पर सवाल: क्या 'माननीय' के प्रतिनिधि के गिरेबान पर हाथ डालेगी पुलिस?

​तहरीर में देवनारायण (पप्पू कोल) ने साफ लिखा है कि धीरज सिंह और उसके 10 गुर्गों ने हथियारों के दम पर तांडव किया। दलितों को जातिसूचक गालियां दी गईं और स्कॉर्पियो के टायर फाड़ दिए गए ताकि कोई मदद के लिए न जा सके। क्या सोनभद्र का प्रशासन इतना बौना हो गया है कि एक दबंग को पकड़ने के लिए उसे दिल्ली-लखनऊ से मुहूर्त निकलवाना पड़ेगा?

बेबाक टिप्पणी

​सोनभद्र में माफिया की मर्जी के बिना पत्ता भी नहीं हिलता। यहाँ कानून की किताब पोकलैंड के नीचे दबी है और इंसाफ रसूखदारों की तिजोरी में बंद है। जब तक वर्दी और सफेदपोशों के दामन से बालू और पत्थर की ये कालिख नहीं हटेगी, तब तक जनता का भरोसा बहाल होना नामुमकिन है। साहब, चश्मा उतारिए... हकीकत बहुत भयावह है!



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