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पश्चिम एशिया के सुलगते हालात पर पीएम मोदी की पैनी नजर, संसद में बोले जयशंकर— 'हर भारतीय की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता'

by on | 2026-03-09 14:38:19

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पश्चिम एशिया के सुलगते हालात पर पीएम मोदी की पैनी नजर, संसद में बोले जयशंकर— 'हर भारतीय की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता'

नई दिल्ली/वाराणसी। पश्चिम एशिया (वेस्ट एशिया) में गहराते युद्ध के बादलों और तनावपूर्ण स्थितियों के बीच भारत सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। आज संसद में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने दो टूक शब्दों में देश को भरोसा दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इस पूरे घटनाक्रम की 'क्लोज मॉनिटरिंग' यानी पल-पल की निगरानी कर रहे हैं। विपक्ष के भारी हंगामे के बीच विदेश मंत्री ने सदन को बताया कि सरकार की प्राथमिकता वहां फंसे करीब एक करोड़ भारतीयों की सुरक्षा और देश की ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखना है।

शांति और कूटनीति ही एकमात्र रास्ता

संसद के दोनों सदनों में दिए अपने बयान में जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत हमेशा से ही शांति, संवाद और कूटनीति का पक्षधर रहा है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से तनाव बढ़ रहा है, वह चिंता का विषय है, लेकिन भारत का मानना है कि केवल बातचीत के जरिए ही इस संकट का हल निकाला जा सकता है। उन्होंने बताया कि सरकार ने 20 फरवरी को ही अपनी गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की थी।

एक करोड़ भारतीयों का भविष्य दांव पर

विदेश मंत्री ने आंकड़ों के जरिए संकट की गंभीरता को समझाते हुए कहा कि खाड़ी देशों में भारत के लगभग एक करोड़ नागरिक रहते और काम करते हैं। इसके अलावा ईरान में भी हजारों भारतीय छात्र और कामकाजी लोग मौजूद हैं। जयशंकर ने खुलासा किया कि अब तक लगभग 67,000 भारतीय नागरिक सुरक्षित वतन वापस लौट चुके हैं और बाकी लोगों की सुरक्षा के लिए संबंधित मंत्रालयों के साथ मिलकर प्रभावी रिस्पांस प्लान तैयार किया जा रहा है। तेहरान में भारतीय दूतावास पूरी तरह सक्रिय है और अलर्ट पर है।

पीएम मोदी ने खुद संभाली कमान

जयशंकर ने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री मोदी ने खुद खाड़ी देशों के राष्ट्राध्यक्षों— यूएई, कतर, सऊदी अरब, ओमान, जॉर्डन, इजरायल और बहरीन के नेताओं से फोन पर लंबी बातचीत की है। इन सभी देशों ने भारतीय समुदाय की सुरक्षा का आश्वासन दिया है। इसके साथ ही पीएम मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक भी हुई है, जिसमें क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक प्रभावों की गहन समीक्षा की गई।

ऊर्जा सुरक्षा पर संकट के बादल

भारत के लिए यह इलाका केवल नागरिकों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है। जयशंकर ने चेतावनी दी कि अगर तनाव और बढ़ा तो ग्लोबल सप्लाई चेन में बड़ा व्यवधान आ सकता है। भारत की ऊर्जा सुरक्षा और तेल-गैस की आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र पर निर्भर है। साथ ही खाड़ी देशों के साथ भारत का सालाना व्यापार लगभग 200 अरब डॉलर का है, जिस पर इस युद्ध का सीधा असर पड़ सकता है।

​फिलहाल, सरकार ने ईरान की अनावश्यक यात्रा न करने की एडवाइजरी जारी रखी है और वहां फंसे हर एक भारतीय को सुरक्षित निकालने के लिए ऑपरेशन जारी है।



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