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नेतन्याहू की चेतावनी: अरब दलों के समर्थन से सरकार बनाने का किया विरोध

by on | 2026-11-08 14:14:14

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नेतन्याहू की चेतावनी: अरब दलों के समर्थन से सरकार बनाने का किया विरोध

यरुशलम | बेबाक24 न्यूज़

इसराइल में नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कार्यवाहक प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने विपक्षी दलों और अरब पार्टियों के संभावित गठबंधन के खिलाफ चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि इस तरह की सरकार देश के लिए गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है।

यह बयान इसराइली राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग की ओर से राजनीतिक दलों के नेताओं से विचार-विमर्श के बाद नेतन्याहू के धुर विरोधी गादी आइज़नकोट को नई सरकार बनाने का न्योता दिए जाने से करीब एक घंटे पहले आया।

नेतन्याहू ने गठबंधन को बताया देश के लिए खतरा

नेतन्याहू ने एक वीडियो संदेश में विपक्षी दलों और अरब पार्टियों के बीच संभावित गठबंधन का विरोध किया। उन्होंने दावा किया कि इस्लामवादी संगठनों से जुड़े दलों के समर्थन वाली सरकार इसराइल को अंदर से कमजोर कर सकती है।

उन्होंने यूरोपीय देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसी सरकार के कारण इसराइल में उनसे भी गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है।

कौन हैं गादी आइज़नकोट?

गादी आइज़नकोट इसराइल की सेना के पूर्व प्रमुख रह चुके हैं। उन्होंने वर्ष 2022 में राजनीति में कदम रखा था। 7 अक्टूबर 2023 को हमास के इसराइल पर हमले के बाद वह नेतन्याहू के युद्ध मंत्रिमंडल में शामिल हुए थे।

हालांकि, बाद के समय में उनके और नेतन्याहू के बीच मतभेद बढ़ गए। आइज़नकोट ने ग़ज़ा युद्ध को लेकर सरकार की रणनीति की आलोचना की और फलस्तीनियों के खिलाफ इसराइली बस्तियों के निवासियों द्वारा की गई हिंसा की भी निंदा की।

चुनाव अभियान में सैन्य अनुभव पर दिया जोर

आइज़नकोट ने चुनाव प्रचार के दौरान अपने सैन्य और सुरक्षा संबंधी अनुभव को प्रमुखता से सामने रखा था। ग़ज़ा युद्ध में उन्होंने अपने बेटे और दो भतीजों को खोया है।

अब राष्ट्रपति की ओर से सरकार बनाने का न्योता मिलने के बाद उन्हें विभिन्न राजनीतिक दलों के समर्थन से नई सरकार गठित करने की चुनौती का सामना करना होगा।

बेबाक24 टेक

इसराइल में सरकार गठन की प्रक्रिया के बीच नेतन्याहू का बयान विपक्षी और अरब दलों के संभावित सहयोग को लेकर राजनीतिक मतभेद उजागर करता है। राष्ट्रपति का आइज़नकोट को न्योता देना सत्ता गठन की प्रक्रिया में नया मोड़ है। आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि आइज़नकोट को किन दलों का समर्थन मिलता है और वह सरकार बनाने के लिए आवश्यक राजनीतिक सहमति कैसे जुटाते हैं।



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