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‘अगर नहीं लौटा तो भूत बनकर आऊंगा…’ अनशन के २०वें दिन सोनम वांगचुक का बड़ा ऐलान; २० जुलाई के संसद मार्च पर अड़े

by on | 2026-07-17 21:52:18

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‘अगर नहीं लौटा तो भूत बनकर आऊंगा…’ अनशन के २०वें दिन सोनम वांगचुक का बड़ा ऐलान; २० जुलाई के संसद मार्च पर अड़े

नई दिल्ली (बेबाक24): दिल्ली के जंतर-मंतर पर देश की परीक्षा प्रणाली में सुधार और पेपर लीक के विरोध में चल रहे आमरण अनशन के 20वें दिन सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने एक बेहद भावुक और चौंकाने वाला बयान दिया है। 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च से ठीक पहले वांगचुक ने कहा कि वे हर हाल में 20 जुलाई तक जीवित रहना चाहते हैं और यदि वे इस आंदोलन से वापस नहीं लौटे, तो 'भूत बनकर' वापस आएंगे।


'भूत बनकर लौटूंगा'— क्या है वांगचुक के बयान के मायने?

अनशन के कारण अत्यधिक कमजोर हो चुके सोनम वांगचुक ने हल्के-फुल्के लेकिन बेहद दृढ़ अंदाज में समर्थकों को संबोधित करते हुए यह बात कही:

  • 20 जुलाई तक जीने की इच्छा: वांगचुक ने कहा कि उनका एकमात्र लक्ष्य इस समय २० जुलाई को होने वाले संसद मार्च तक खुद को जीवित और सक्रिय रखना है, ताकि छात्रों की आवाज को बुलंद किया जा सके।

  • अंतिम सांस तक संघर्ष: उन्होंने कहा, "यह संघर्ष किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य को बचाने के लिए है। अगर हमारा यह मिशन पूरा नहीं हुआ और मैं वापस नहीं लौट पाया, तो भूत बनकर लौटूँगा।" उनके इस बयान ने जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों में नया जोश भर दिया है।

विपक्षी दलों का मिला भारी समर्थन: जंतर-मंतर पर जुटी राजनीतिक हस्तियां

जैसे-जैसे सोनम वांगचुक के अनशन के दिन बढ़ रहे हैं, विपक्ष इस मुद्दे पर लामबंद होता दिख रहा है। पिछले दो दिनों में कई प्रमुख दलों के नेता जंतर-मंतर पहुंचे:

  • विपक्षी दलों की एकजुटता: समाजवादी पार्टी (सपा), आजाद समाज पार्टी (कांशीराम), आम आदमी पार्टी (आप) और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने प्रदर्शन स्थल पर जाकर वांगचुक के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया।

  • कांग्रेस का तीखा प्रहार: कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने प्रतिनिधिमंडल के साथ पहुंचकर कहा, "हम सभी को वांगचुक जी के स्वास्थ्य की गहरी चिंता है। केंद्र में बैठी यह सरकार पूरी तरह संवेदनहीन हो चुकी है, जो शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक विरोध की भाषा को भी समझने से इनकार कर रही है।"

स्वास्थ्य को लेकर डॉक्टरों की बड़ी चेतावनी

लगातार २० दिनों से अन्न का एक भी दाना न लेने के कारण वांगचुक की शारीरिक स्थिति अब नाजुक मोड़ पर पहुंच गई है:

  • अंगों के निष्क्रिय होने का खतरा: डॉक्टरों के दल ने चेतावनी दी है कि उनका उपवास अब उस गंभीर चरण में पहुंच चुका है जहां शरीर के महत्वपूर्ण अंगों (ऑर्गन्स) को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है।

  • अदालत का कड़ा निर्देश: दिल्ली उच्च न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं कि सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य संकेतकों की प्रतिदिन गहनता से निगरानी की जाए।

सोनम वांगचुक का अनशन: मुख्य अद्यतन

मुख्य पहलूवर्तमान स्थिति (१७ जुलाई २०२६)
अनशन का दिन20वां दिन (२८ जून से निरंतर जारी)
प्रमुख मांगपेपर लीक मामलों की जवाबदेही तय हो और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें।
प्रमुख सहयोगीअभिजीत दीपके और कॉकरोच जनता पार्टी के छात्र कार्यकर्ता।
आगामी बड़ा कदम२० जुलाई २०२६ को जंतर-मंतर से संसद भवन तक प्रस्तावित विशाल मार्च।

बेबाक24 टेक

सोनम वांगचुक का 'भूत बनकर लौटने' वाला बयान भले ही हल्के अंदाज में दिया गया हो, लेकिन इसके पीछे छिपी पीड़ा और व्यवस्था के प्रति गहरा आक्रोश साफ दिखाई देता है। देश के एक शीर्ष वैज्ञानिक और शिक्षाविद को परीक्षा सुधारों जैसी बुनियादी मांग के लिए अपनी जान दांव पर लगानी पड़ रही है, जो भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था की संवादहीनता को दर्शाता है।

बेबाक24 का मानना है कि २० जुलाई के संसद मार्च से पहले यदि सरकार ने इस अनशन पर अपनी चुप्पी नहीं तोड़ी, तो जंतर-मंतर का यह आक्रोश एक बड़े राष्ट्रव्यापी छात्र आंदोलन का रूप ले सकता है। किसी भी लोकतांत्रिक सरकार के लिए अपने नागरिकों की जान की सुरक्षा और उनकी जायज चिंताओं को सुनना सर्वोपरि होना चाहिए।



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