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अहरौरा टोल प्लाजा बना 'वसूली अड्डा': ट्रक चालक से मारपीट कर जबरन खाते में ट्रांसफर कराए 20 हजार, 40 हजार की थी मांग

by on | 2026-04-10 17:19:26

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अहरौरा टोल प्लाजा बना 'वसूली अड्डा': ट्रक चालक से मारपीट कर जबरन खाते में ट्रांसफर कराए 20 हजार,  40 हजार की थी मांग

मिर्जापुर/वाराणसी: अहरौरा स्थित टोल प्लाजा एक बार फिर अपनी दबंगई और गुंडई को लेकर सुर्खियों में है। ताजा मामला मध्य प्रदेश के एक ट्रक चालक के साथ लूट-खसोट और मारपीट का सामने आया है, जहाँ टोल कर्मियों ने रसूख के दम पर न केवल चालक को धमकाया, बल्कि जबरन हजारों रुपए अपने खाते में ट्रांसफर भी करवा लिए।

खंभे से टकराई ट्रक तो शुरू हुआ 'वसूली' का खेल

​जानकारी के अनुसार, ट्रक संख्या JH 03 AM 1444 एमपी के सिंगरौली से कोयला लादकर चंदौली की चंधासी मंडी जा रहा था। अहरौरा टोल के पास एक अन्य वाहन को बचाने के चक्कर में ट्रक डिवाइडर पर चढ़ गया और एक खंभे से टकरा गया। खंभा टेढ़ा क्या हुआ, टोल कर्मियों को मानो लूट का लाइसेंस मिल गया। आरोप है कि कर्मियों ने चालक सत्यम केवट के साथ फौरन हाथापाई शुरू कर दी और मोटी रकम की डिमांड करने लगे।

मैनेजर पर लगा पीछा करने और बंधक बनाने का आरोप

​ट्रक मालिक संजय सिंह के मुताबिक, जान बचाने के लिए चालक वहां से भागा तो टोल मैनेजर अतुल सिंह ने स्कॉर्पियो से पीछा कर उसे रुकवा लिया। इसके बाद धमकाकर उमेश कुमार सिंह नामक व्यक्ति के खाते में 20 हजार रुपए ट्रांसफर कराए गए। इतना ही नहीं, जब मालिक संजय सिंह मौके पर पहुंचे, तो उन्हें भी बंधक बनाकर 40 हजार रुपए अतिरिक्त देने का दबाव बनाया गया। आरोप है कि मैनेजर ने पुलिसिया पहुंच की धमक देते हुए कहा— "पैसे दो वरना झूठे मुकदमे में फंसवा देंगे।"

विवादों का पुराना गढ़ है अहरौरा टोल

​यह कोई पहली घटना नहीं है। मई 2025 में भी यहाँ पैरामिलिट्री जवान के साथ मारपीट का वीडियो वायरल हुआ था। खुद केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल इस टोल को हटाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिख चुकी हैं, लेकिन टोल प्रशासन की तानाशाही थमने का नाम नहीं ले रही।

कैथी टोल की 'दबंगई': 50 साल पुराना रास्ता बोल्डर रखकर किया बंद!

​वहीं दूसरी ओर, वाराणसी-गोरखपुर मार्ग पर स्थित कैथी टोल प्लाजा ने भी अपनी मनमानी की सारी हदें पार कर दी हैं। रजवारी रेलवे स्टेशन जाने वाले दशकों पुराने मार्ग को टोल प्रबंधन ने बोल्डर रखकर बंद कर दिया है।

बड़ा सवाल: आखिर किसके शह पर ये टोल माफिया आम जनता का रास्ता रोक रहे हैं? क्या जिला प्रशासन और पुलिस ने इन टोल संचालकों के आगे घुटने टेक दिए हैं या फिर 'ऊपर' तक हिस्सा पहुंच रहा है? 50 साल पुराने रास्ते का बंद होना स्थानीय लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है, लेकिन जिम्मेदार मौन हैं।



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