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करोड़ों की ठगी का 'कनक' जाल, पुलिस की गिरफ्त में शातिर सुरेंद्र जायसवाल!

by on | 2026-04-06 22:20:55

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करोड़ों की ठगी का 'कनक' जाल, पुलिस की गिरफ्त में शातिर सुरेंद्र जायसवाल!

वाराणसी। ठगी के धंधेबाज चाहे जितनी भी गलियां बदल लें, कानून के हाथ उन तक पहुंच ही जाते हैं। वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट के वरुणा जोन में अपराधियों और वांछितों के खिलाफ छेड़े गए 'सफाई अभियान' के तहत थाना सारनाथ पुलिस को एक बड़ी कामयाबी मिली है। अपनी कंपनी के नाम पर निवेश का झांसा देकर करोड़ों के वारे-न्यारे करने वाला शातिर आरोपी सुरेंद्र जायसवाल अब सलाखों के पीछे है।

धोखाधड़ी का 'निनिधि' कनेक्शन: क्या है पूरा खेल?

​मामला "कनक प्रीति निधि लिमिटेड" नामक कंपनी से जुड़ा है। बेबाक जांच में यह सामने आया कि आरोपी सुरेंद्र ने मुनाफे का सपना दिखाकर पीड़ितों से मोटी रकम ऐंठी थी। 20 मार्च 2025 को दर्ज हुई एक शिकायत के मुताबिक, आरोपी ने RTGS के जरिए करीब 57.5 लाख रुपये अपने खाते में डलवाए।

​जब निवेश की गई खून-पसीने की कमाई वापस मांगी गई, तो आरोपी अपनी असलियत पर उतर आया। उसने न सिर्फ पैसे देने से इनकार किया, बल्कि गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देकर पीड़ितों को डराने की कोशिश की।

रात के अंधेरे में सारनाथ पुलिस का करारा प्रहार

​थानाध्यक्ष पंकज कुमार त्रिपाठी के नेतृत्व में पुलिस टीम लगातार इस भगोड़े की तलाश में थी। 4 अप्रैल 2026 की रात, जब आरोपी को लगा कि मामला शांत हो गया है, तभी पुलिस ने रात करीब 10:50 बजे उसे थाना सारनाथ परिसर के पास से दबोच लिया। फरार आरोपी ठिकाने बदल-बदल कर छिप रहा था, लेकिन पुलिस की पैनी नजरों से बच नहीं सका।

जुर्म की स्वीकारोक्ति: घर बेचा, पैसे उड़ाए और फिर फरार

​पूछताछ में जो सच सामने आया है, वह किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। आरोपी सुरेंद्र ने कबूल किया कि:

  • ​उसने कंपनी और व्यक्तिगत नाम पर लाखों रुपये लिए।
  • ​निवेश की गई अधिकांश राशि को उसने अपने निजी ऐशो-आराम और खर्चों में उड़ा दिया।
  • ​जब दबाव बढ़ा, तो भरोसा जीतने के लिए 57.5 लाख का चेक थमाया, जो महज एक कागजी टुकड़ा साबित हुआ।
  • ​कर्ज के बोझ और कानूनी शिकंजे से बचने के लिए उसने अपना मकान तक बेच दिया और किराए के कमरों में छिपकर 'फरारी' काट रहा था।



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