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UP कॉलेज हत्याकांड: भोजूबीर में भारी बवाल, दुकानों में तोड़फोड़, पुलिस कमिश्नर ने संभाला मोर्चा

by on | 2026-03-20 17:10:58

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UP कॉलेज हत्याकांड: भोजूबीर में भारी बवाल, दुकानों में तोड़फोड़, पुलिस कमिश्नर ने संभाला मोर्चा

वाराणसी। उदय प्रताप (UP) कॉलेज में छात्र सूर्य प्रताप सिंह की हत्या के बाद काशी का पारा चढ़ गया है। गाजीपुर के छात्र की मौत की खबर फैलते ही भोजूबीर इलाका रणक्षेत्र बन गया। आक्रोशित छात्रों और स्थानीय लोगों के उबाल ने कानून-व्यवस्था को चुनौती दे दी है। उपद्रवियों ने इलाके की दुकानें बंद करा दीं और जमकर तोड़फोड़ की, जिसके बाद खुद पुलिस कमिश्नर को सड़क पर उतरकर कमान संभालनी पड़ी।

भोजूबीर में 'तांडव', पुलिस के फूले हाथ-पांव

​हत्या के विरोध में उतरे छात्रों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। भोजूबीर चौराहे पर प्रदर्शनकारियों ने जमकर उत्पात मचाया। बाजार पूरी तरह बंद करा दिए गए हैं और स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए भारी पुलिस बल के साथ पीएसी को भी तैनात किया गया है। पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने मौके पर पहुंचकर उपद्रवियों को सख्त चेतावनी दी और शांति बनाए रखने की अपील की है।

अपराधी प्रवृत्ति का है हत्यारा, कैंपस में 'खूनी' खेल

​जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि हत्या का मुख्य आरोपी मंजीत चौहान (एमए द्वितीय वर्ष का छात्र) पहले से ही अपराधी प्रवृत्ति का रहा है। मंजीत ने सुनियोजित तरीके से बीए चतुर्थ सेमेस्टर के छात्र सूर्य प्रताप सिंह को निशाना बनाया। प्रिंसिपल कार्यालय के सामने जिस दुस्साहस के साथ चार राउंड फायरिंग की गई, उसने कॉलेज की 'अनुशासन' वाली छवि को लहूलुहान कर दिया है।

पूरी वारदात पर एक नज़र:

  • समय: शुक्रवार सुबह करीब 11:00 बजे।
  • स्थान: सामाजिक विज्ञान संकाय गलियारा (प्रिंसिपल ऑफिस के सामने)।
  • कातिल: मंजीत चौहान (चांदमारी निवासी, एमए द्वितीय वर्ष)।
  • शिकार: सूर्य प्रताप सिंह (सैदपुर, गाजीपुर निवासी)।
  • हथियार: वारदात के बाद कूड़े के ढेर से बरामद पिस्टल।

प्रशासनिक फेल्योर: हथियार लेकर कैसे घुसा अपराधी?

​सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक अपराधी प्रवृत्ति का छात्र आखिर पिस्टल लेकर कैंपस के भीतर कैसे पहुंचा? कॉलेज प्रशासन के सुरक्षा दावों की पोल खुल चुकी है। हत्या के बाद आरोपी का दीवार फांदकर भाग जाना यह बताता है कि उसे कैंपस के चप्पे-चप्पे की जानकारी थी और उसे किसी का खौफ नहीं था।

बेबाक टिप्पणी:

जब शिक्षा के मंदिर में किताबों की जगह कट्टे गरजने लगें, तो समझ लीजिए कि व्यवस्था आईसीयू में है। पुलिस कमिश्नर की सक्रियता अपनी जगह है, लेकिन सवाल तो कॉलेज प्रशासन से भी पूछा जाएगा कि उनकी नाक के नीचे 'खून की ये पटकथा' कैसे लिखी गई? क्या अब छात्रों को सुरक्षा के लिए भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है?



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