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गाजीपुर: 'साहब' की सरपरस्ती और कृषि विभाग की मनमानी, फाइलों के अंबार पर सो रहे 'हाकिम'!

by on | 2026-03-16 20:57:27

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गाजीपुर: 'साहब' की सरपरस्ती और कृषि विभाग की मनमानी, फाइलों के अंबार पर सो रहे 'हाकिम'!



गाजीपुर। राइफल क्लब में हुई जिला उद्योग बंधु की बैठक महज एक सरकारी औपचारिकता नहीं थी, बल्कि यह उन विभागों की पोल खोलने का जरिया बनी जो विकास के नाम पर 'कुंडली' मारकर बैठे हैं। मुख्य विकास अधिकारी (CDO) संतोष कुमार वैश्य ने जब फाइलों का हिसाब मांगा, तो कृषि विभाग की सुस्ती ने सबका ध्यान खींच लिया।

कृषि विभाग: मनमानी का 'मॉडल' या मंत्री जी का 'आशीर्वाद'?

जनपद में इस वक्त कृषि विभाग चर्चा का केंद्र बना हुआ है। बैठक में खुलासा हुआ कि 20 लंबित मामलों के साथ यह विभाग जिले में 'सुस्ती का सिरमौर' बना हुआ है।

 * तानाशाही का आलम: चर्चा है कि जिला कृषि अधिकारी के मनमाने और तानाशाही रवैये से पूरा जनपद कराह रहा है।

 * किसानों की बदहाली: एक तरफ किसान महंगे दाम पर खाद-बीज खरीदने को मजबूर हैं, वहीं दूसरी तरफ कालाबाजारी अपने चरम पर है।

 * जांच का 'ठंडा बस्ता': हाल ही में रेवतीपुर ब्लॉक में भवन निर्माण में भारी अनियमितता की बात सामने आई थी, लेकिन सूत्र बताते हैं कि 'ऊपर' (माननीय मंत्री जी) का हाथ होने के कारण मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। आखिर जब रक्षक ही भक्षक की पीठ थपथपाए, तो न्याय की उम्मीद किससे?

पोर्टल पर 'पेंडिंग' विकास: सीडीओ का हंटर

CDO संतोष कुमार वैश्य ने साफ लहजे में कह दिया है कि 'निवेश मित्र' पोर्टल पर खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा। विभागों की लापरवाही का कच्चा चिट्ठा देखिए:

 विभाग : लंबित मामले और स्थिति 


कृषि विभाग : 20  सबसे फिसड्डी और लापरवाह ।


 राजस्व विभाग :  17 फाइलों की सुस्त चाल ।


UPPCL (बिजली) : 03  वसूली में तेज, समाधान में पीछे ।


 प्रदूषण बोर्ड : 05  समय-सीमा खत्म, फिर भी सुस्त ।


प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी को तो 2 दिन की आखिरी मोहलत दी गई है। अगर काम नहीं हुआ, तो गाज गिरना तय है।


बिजली विभाग की 'अड़ियल' चाल और सड़कों का 'पैचवर्क'

मुगलानीचक के उद्यमी बषिष्ट सिंह यादव (मेसर्स ब्राई प्लास्ट) ने बैठक में अपना दर्द रखा। कोर्ट के आदेश के बाद भी ₹1,93,775 का गलत बिल और ऊपर से 'रेगुलरटी सरचार्ज' का बोझ! अधिशासी अभियंता की अड़ियल दलील पर सीडीओ ने अब इस मामले की फाइल जांच के लिए अधीक्षण अभियंता को सौंप दी है।

वहीं, जल निगम (शहरी) ने दावा किया है कि लालदरवाजा (गोइजीतर) की महज 30 मीटर सड़क का काम बाकी है। शहर की जनता अब गड्ढों से मुक्ति का बेसब्री से इंतजार कर रही है।

> बेबाक टिप्पणी: गाजीपुर में विकास की गाड़ी इसलिए बेपटरी है क्योंकि कुछ अधिकारी खुद को 'नियम' से ऊपर और 'जनता' से दूर समझते हैं। जब तक कृषि विभाग जैसे 'सुस्त हाथी' नहीं दौड़ेंगे और राजनीतिक संरक्षण के नाम पर हो रही मनमानी नहीं रुकेगी, तब तक निवेशकों का 'मित्र' कोई नहीं बनेगा!




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