ब्रेकिंग न्यूज़
सोमनाथ में श्रद्धा और शक्ति का सैलाब: पीएम मोदी ने डमरू बजाकर और त्रिशूल थामकर किया 'शौर्य यात्रा' का शंखनाद
ताजा खबर ताजा खबर

दीनदयाल अस्पताल की पैथोलॉजी बनी 'मयखाना', मरीजों के खून की जांच वाली मेज पर सजी जाम और चिकन की दावत!

by on | 2026-03-15 20:43:49

Share: Facebook | Twitter | WhatsApp | LinkedIn Visits: 3283


दीनदयाल अस्पताल की पैथोलॉजी बनी 'मयखाना', मरीजों के खून की जांच वाली मेज पर सजी जाम और चिकन की दावत!

वाराणसी। सरकारी सिस्टम की बेशर्मी की इंतहा देखनी हो, तो शिवप्रसाद गुप्त के बाद अब पंडित दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल चले आइए। जहाँ मरीजों के खून के नमूने जांचे जाने चाहिए, वहाँ 'साहबों' के जाम छलक रहे हैं। जिस मेज पर कल तक गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों की रिपोर्ट तैयार होती थी, आज उसी मेज पर चखना और नॉनवेज परोसा जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक शर्मनाक वीडियो ने स्वास्थ्य विभाग के दावों की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं।

मशीनों के बीच 'मधुशाला': ड्यूटी या अय्याशी?

​वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि अस्पताल की पैथोलॉजी लैब, जो कि ओपीडी और इमरजेंसी की रीढ़ मानी जाती है, उसे मयखाने में तब्दील कर दिया गया है। लैब टेक्नीशियन और कुछ संविदा कर्मचारी ड्यूटी के वक्त ही मेज पर तीन गिलास में शराब और प्लेट में नॉनवेज सजाकर 'पार्टी' मूड में हैं। बगल में करोड़ों की मशीनें रखी हैं और सामने सरकारी रसूख का नशा। सवाल यह है कि जो हाथ शराब के नशे में कांप रहे हों, वो मरीजों की जांच रिपोर्ट में कितनी सटीकता बरतते होंगे?

पुराना है 'अश्लीलता और अनुशासनहीनता' का नाता

​यह पहली बार नहीं है जब दीनदयाल अस्पताल सुर्खियों में है। अभी कुछ महीने पहले ही इसी अस्पताल के कर्मचारियों का स्टाफ नर्सों के साथ भोजपुरी गानों पर ठुमके लगाने का वीडियो वायरल हुआ था। उस वक्त सूबे के स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने सख्त नाराजगी जताई थी, लेकिन नतीजा क्या निकला? 'ढाक के वही तीन पात'। केवल चेतावनी देकर मामला रफा-दफा कर दिया गया। शायद इसी 'नरम रुख' का नतीजा है कि आज कर्मचारी अस्पताल को पिकनिक स्पॉट समझ बैठे हैं।

साहब बोले- 'जांच होगी', जनता बोली- 'कब तक?'

​मामला गरमाया तो मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) डॉ. आरएस राम ने इसे 'शर्मनाक' करार देते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं। उन्होंने दोषियों की पहचान कर कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। लेकिन बनारस की जनता पूछ रही है कि क्या यह जांच भी पिछली बार की तरह फाइलों में दफन हो जाएगी? या फिर इस बार इन 'सफेदपोश' शराबियों पर ऐसी गाज गिरेगी जो दूसरों के लिए नजीर बने?

बेबाक टिप्पणी: > सरकारी अस्पतालों में गरीब इस उम्मीद में आता है कि उसे नया जीवन मिलेगा, लेकिन यहाँ तो कर्मचारी ही 'नशे' में चूर हैं। जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं और इलाज की जगह अय्याशी होने लगे, तो सिस्टम को 'बीमार' कहना गलत नहीं होगा। स्वास्थ्य मंत्री जी, केवल आदेश से काम नहीं चलेगा, अब इन 'अजगरों' पर हंटर चलाने का वक्त आ गया है।



Search
Recent News
Top Trending
Most Popular

Leave a Comment