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मजदूरी का 'अडानी' मॉडल? दो महीने से पसीना बहा रहे मजदूरों का फूटा गुस्सा!

by on | 2026-02-27 21:30:53

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मजदूरी का 'अडानी' मॉडल? दो महीने से पसीना बहा रहे मजदूरों का फूटा गुस्सा!

सोनभद्र (चोपन): उद्योगपतियों की तिजोरियां तो भर रही हैं, लेकिन उन तिजोरियों को अपने पसीने से सींचने वाले मजदूरों के चूल्हे ठंडे पड़ रहे हैं। मामला सोनभद्र जिले के चोपन थाना क्षेत्र अंतर्गत सलईबनवा का है, जहाँ निर्माणाधीन अडानी एसीसी सीमेंट प्लांट के गेट पर आज मजदूरों के सब्र का बांध टूट गया।

​सैकड़ों की संख्या में मजदूरों ने प्लांट के गेट नंबर 2 और 3 को घेर लिया और जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। मांग सीधी है— "हमारा हक, हमारा भुगतान।"

शोषण की इंतहा: 8 की जगह 12 घंटे काम, फिर भी वेतन गायब!

​मजदूरों का आरोप है कि स्नेहा इंजीनियरिंग, तिरूपती आईडीएल, शिवम इंजिनियरिंग और बीके इंजिनियरिंग जैसे ठेकेदार उनका खून चूस रहे हैं। प्रदर्शन कर रहे मजदूरों (प्रकाश कुमार, अवध राम, शिवपूजन व अन्य) ने बेबाकी से ठेकेदारों की पोल खोली:

  • बकाया वेतन: पिछले दो महीने से वेतन नहीं मिला है। मांगने पर सिर्फ 'कल-परसों' का झुनझुना थमाया जाता है।
  • ओवरटाइम का खेल: मजदूरों से जबरन 12-12 घंटे काम लिया जा रहा है, लेकिन नियमानुसार मिलने वाला 'डबल ओटी' (Overtime) तो दूर, सामान्य भुगतान भी नहीं हो रहा।
  • साप्ताहिक अवकाश गायब: महीने के 30 दिन काम कराया जा रहा है। मजदूरों को एक दिन की भी छुट्टी नसीब नहीं है।
  • लंच पर भी कैंची: आरोप है कि मजदूरों के लंच का पैसा भी काटा जा रहा है और पीएफ कटौती के नाम पर भी असमंजस की स्थिति है।
  • ​"हमें बस 8 घंटे की ड्यूटी चाहिए। अगर ज्यादा काम लिया जाए तो उसका ओटी मिले और महीने में कम से कम 4 दिन की छुट्टी सुनिश्चित हो ताकि हम भी इंसान की तरह जी सकें।" — आक्रोशित मजदूर


    साहब को 'खबर' ही नहीं!

    ​हैरानी की बात यह है कि जहाँ सैकड़ों मजदूर गेट पर चीख रहे थे, वहीं सिस्टम अपनी नींद में मस्त था। जब इस मामले पर प्रोजेक्ट हेड नीरज त्रिपाठी से बात की गई, तो उनका जवाब रटा-रटाया था— "मैं बाहर हूँ, मुझे इस विरोध प्रदर्शन या भुगतान संबंधी किसी समस्या की जानकारी नहीं है।" अब सवाल यह उठता है कि इतने बड़े प्रोजेक्ट की कमान संभालने वालों को अपनी नाक के नीचे हो रहे शोषण की भनक तक क्यों नहीं लगती?

    डेढ़ घंटे बाद आश्वासन पर थमा प्रदर्शन

    ​लगभग डेढ़ घंटे तक चले हंगामे और नारेबाजी के बाद, प्रबंधन की ओर से मिले आश्वासन पर मजदूरों ने फिलहाल हड़ताल खत्म की और काम पर लौटे। लेकिन सवाल अभी भी बरकरार है— क्या आश्वासन से पेट भरेगा या मजदूरों के खातों में उनका हक पहुंचेगा?

    इन लोगों ने बुलंद की आवाज:

    प्रदर्शन में मुख्य रूप से डब्लू साहनी, शुभम, अवधेश, लालू विश्वकर्मा, दिनेश शर्मा, अफसार, राजेश पांडे, कार्तिक, गोपाल, राजाराम पासवान समेत दर्जनों श्रमिक शामिल रहे।



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